कानपुर, जागरण संवाददाता। साढ़ में अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्राली पलटने 26 लोगों की मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई तो सभी के दिल दहल गए। ट्राली के नीचे दबे 13 महिलाओं और 13 बच्चों की मौत फेफड़ों में पानी भरने की वजह से हुई है। सभी ट्रैक्टर-ट्राली के नीचे इस कदर दबे कि बच निकलने का रास्ता नहीं मिला और तड़प-तड़पकर जान गंवा बैठे।

सीएचसी बना पोस्टमार्टम हाउस, दस डॉक्टरों की लगी ड्यूटी

देर रात हादसे के बाद के बाद एक साथ 26 शवों का पोस्टमार्टम कराने और बवाल की आशंका से बचने के लिए प्रशासन ने भीतरगांव सीएचसी में ही पोस्टमार्टम कराने का फैसला किया। सीएमओ डा. आलोक रंजन के निर्देश पर शहर से पोस्टमार्टम प्रभारी डा. नवनीत चौधरी, फार्मासिस्ट दिलीप सचान, नवनीत के साथ पोस्टमार्टम कर्मचारियों को सीएचसी लाया गया।

एक साथ इतने शवों का पंचायतनामा भरने के लिये साढ़, घाटमपुर, बिधनू और आसपास के सभी थाने के दारोगा की ड्यूटी लगाई गई। पोस्टमार्टम करने के लिए डा. अरविंद अवस्थी, डा.विपुल चतुर्वेदी, डा.सुनील, डा.विशाल गौतम, डा. रमेश, डा. अवधेश कुमार व देवेंद्र राजपूत समेत दस डाक्टरों की ड्यूटी लगाई गई।

प्रशासन चाह रहा था कि सूर्य निकलने से पहले शवों को किसी तरह से ड्योढ़ी घाट पहुंचाया जाए। जैसे जैसे शवों का पोस्टमार्टम होता जा रहा था, एंबुलेंस से शवों को गांव भिजवाया जाता रहा। सुबह साढ़े पांच बजे तक सभी शवों को गांव पहुंचा दिया गया। इस दौरान बवाल की आशंका के चलते कई थानों का फोर्स तैनात रहा।

कितना तड़पे होंगे महिलाएं और बच्चे सोचकर कांप जाए रुह

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद साफ है कि ट्राली पलटने के बाद नीचे दबे महिलाएं व बच्चे जीवित थे लेकिन पानी अंदर होने से सभी बाहर निकलने के कितना छटपटाए होंगे। मौत आने से पहले उल्टी ट्राली के अंदर फंसे महिलाएं और बच्चे कितना तड़पे होंगे, यह सोचने मात्र से ही रुह कांप जाए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी मृतकों को मामूली चोटें और खरोंच ही आई थीं लेकिन सभी की मौत डूबने से होना बताई गई है। पोस्टमार्टम के दौरान सभी बच्चों और महिलाओं के फेफड़ों और पेट में पानी भरा मिला।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर लोगों ने कहा कि इससे साफ है कि यदि ट्राली पलटने वाले स्थान पर पानी नहीं भरा होता तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं क्योंकि सभी मृतक महिलाओं और बच्चों में चोंट के मामूली ही निशान मिले हैं। यानी कि हादसे में मरने वालों की संख्या कम और घायलों की अधिक होती। ट्राली के नीचे फंसे बच्चे और महिलाएं पानी में डूबे रहे और उनकी जान चली गई। 

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Edited By: Abhishek Agnihotri

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