गुलाब छोड़ 'कलकतिया गेंदा' की खेती से कानपुर के किसान ने बदली तकदीर, 1.5 बीघे से 10 लाख की कमाई
कानपुर के किसान जय नारायण सिंह सेंगर ने गुलाब की खेती छोड़कर 'कलकतिया गेंदे' की खेती अपनाई, जिससे उन्हें सालाना लाखों की आय हो रही है।

कलकतिया गेंदा की खेती से किसान जय नारायण कर रहे लाखों की कमाई।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, कानपुर। खेत में दूर तक फैले पीले और नारंगी गेंदे के फूल, सुबह-सुबह तुड़ाई में जुटे मजदूर और मंडी भेजने की तैयारियां... बिधनू ब्लॉक के भारू गांव में इन दिनों यह नजारा हर दिन देखने को मिलता है। इन फूलों के पीछे छिपी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं।
एक समय गुलाब की खेती करने वाले किसान जय नारायण सिंह सेंगर ने जब बढ़ती लागत और घटते मुनाफे को देखा तो बड़ा फैसला लिया। उन्होंने गुलाब छोड़ दिया और पूरी ताकत ''कलकतिया गेंदे'' की खेती पर लगा दी। यही फैसला आज उनकी पहचान और खुशहाली की वजह बन गया है।
वर्ष 1979 में फूलों की खेती शुरू करने वाले जय नारायण ने शुरुआत चार बीघे में गुलाब और गेंदे के साथ की थी। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि गुलाब की खेती में लागत ज्यादा और जोखिम भी अधिक है।
डेढ़ बीघे में 15 हजार पौधे लहलहा रहे
चार वर्ष पहले उन्होंने पूरी तरह कलकतिया गेंदे की खेती का रुख किया। आज डेढ़ बीघे में करीब 15 हजार पौधे लहलहा रहे हैं और इन्हीं फूलों से हर साल लाखों रुपये की आमदनी हो रही है।
कोलकाता से मंगाई जाने वाली पौध को पहले नर्सरी में तैयार किया जाता है। इसके बाद खेत में रोपाई कर नियमित सिंचाई और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल की जाती है। मेहनत का नतीजा यह है कि उनके खेत से निकलने वाला गेंदा कानपुर के साथ लखनऊ, दिल्ली, झांसी और जालौन की मंडियों तक पहुंच रहा है।
फूलों की असली बहार त्योहारों में आती है। सावन में जहां गेंदा करीब 70 रुपये प्रति किलो बिकता है, वहीं जन्माष्टमी, नवरात्र और अन्य मांग वाले दिनों में इसका भाव 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। जय नारायण बताते हैं कि इसी वजह से एक महीने में करीब दो लाख रुपये की बिक्री हो जाती है और पूरे साल की आय लगभग 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।
जय नारायण की पहचान केवल सफल किसान तक सीमित नहीं है। उनका खेत अब प्रशिक्षण केंद्र जैसा बन गया है। यहां आने वाले किसानों को वे व्यावसायिक खेती की बारीकियां सिखाते हैं। अब तक दो हजार से अधिक किसान उनसे प्रशिक्षण ले चुके हैं। वर्ष 2013 में गुजरात सरकार ने उन्हें सम्मानित किया था। उद्यान विभाग और जिला प्रशासन भी समय-समय पर उन्हें सम्मानित कर चुका है।
जय नारायण कहते हैं कि खेती में वही किसान आगे बढ़ेगा, जो बाजार की मांग को समझेगा। पारंपरिक खेती के साथ व्यावसायिक फसलों को अपनाकर कम जमीन से भी अच्छी आय हासिल की जा सकती है। उनका मानना है कि सरकार की योजनाओं और आधुनिक तकनीक का लाभ लेकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकते हैं।
एक नजर में सफलता
- 47 वर्षों से फूलों की खेती
- डेढ़ बीघे में 15 हजार कलकतिया गेंदे के पौधे
- सालाना करीब 10 लाख रुपये की आय
- 2013 में गुजरात सरकार से सम्मान
त्योहार बढ़ाते हैं मुनाफा
- सावन में 70 रुपये किलो तक भाव
- जन्माष्टमी-नवरात्र में 200 रुपये किलो तक कीमत
- दिल्ली, लखनऊ, झांसी और जालौन तक जाती है सप्लाई
किसान नहीं, अब गुरु भी
- दो हजार से अधिक किसानों को दिया प्रशिक्षण
- आधुनिक फूलों की खेती के लिए करते हैं प्रेरित
- उद्यान विभाग के प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का उठाया लाभ
यह भी पढ़ें- निर्यात बढ़ा, बदले किस्मत के पन्ने: योगी नीति से बढ़ा विदेशी निवेश, गन्ना किसानों को मिल रहा सीधा मुनाफा
