कानपुर, जेएनएन। देश में हजारों करोड़ का एक और बैंकिंग फ्रॉड सामने आने के बाद कारोबार जगत में हलचल मच गई है। बैंक से हजारों करोड़ का ऋण लेकर अदा न करने वाले विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे कारोबारियों की सूची में कानपुर से भी दो नाम शामिल हो गए हैं। अपनी बड़ी कंपनियों की साख पर कागजों पर फर्जी कंपनी संचालित करके हजारों करोड़ का ऋण लेने वाले कारोबारी बैंक की अर्थ व्यवस्था को चौपट कर रहे हैं। ऐसे ही शहर के हीरा कारोबारी उदय देसाई और सुजय देसाई पर सीबाआइ ने शिकंजा कस दिया है। 14 बैंकों के कंसोर्टियम के 3592 करोड़ रुपये का कर्ज डूबने पर 15 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। सीबीआइ ने हीरा कारोबारी की कानपुर, मुंबई और दिल्ली के 13 ठिकानों पर छापा मारकर दस्तावेज खंगाले हैं।

आठ साल में लिया तीन हजार करोड़

हीरा कारोबारी उदय देसाई ने अपनी कंपनियों मैसर्स फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड व फ्रॉस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर वर्ष 2002 से 2010 तक कुल तीन हजार करोड़ रुपये का लोन ले रखा है। वर्ष 2018 में किस्तें जमा नहीं होने पर ऋण खाते गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित हो गए। एनपीए घोषित होते वक्त यानी नवंबर 2018 तक कंपनियों पर कुल 3635.24 करोड़ रुपये बकाया हो चुका था। वहीं सीबीआइ में दर्ज मुकदमे के अनुसार कंसोर्टियम से कुल 4061.95 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा ली गई थी। ऋण अदा न करने पर बैंकों को 3592.48 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

नवंबर 2018 तक इतना बकाया

  • बैंक ऑफ इंडिया- 606.17 करोड़
  • बैंक ऑफ बड़ौदा- 526.05 करोड़
  • कैनरा बैंक- 144.78 करोड़
  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया- 388.08 करोड़
  • आंध्राबैंक- 47.84 करोड़
  • ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स- 216.66 करोड़
  • पंजाब नेशनल बैंक- 281.98 करोड़
  • सिंडीकेट बैंक- 102.27 करोड़
  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया- 166.58 करोड़
  • यूको बैंक- 553.13 करोड़
  • विजया बैंक- 243.15 करोड़
  • इलाहाबाद बैंक- 285.77 करोड़
  • यूनाइटेड बैंक- 186.44 करोड़

ज्यादातर संपत्तियों पर बैंक का कब्जा

फ्रॉस्ट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड की कानपुर और मुंबई की ज्यादातर संपत्तियों पर बैंकों ने कब्जा ले लिया है। केवल बिरहाना रोड स्थित कल्पना प्लाजा में ही कंपनी की पांच संपत्तियां हैं, जिन पर बैंकों ने पिछले वर्ष अधिपत्य नोटिस जारी किया था। इसके अलावा लखनपुर की दो संपत्तियों पर भी कब्जा नोटिस जारी किया है। कंपनियां ये संपत्तियां किसी को नहीं बेच सकती हैं। मुंबई में भी कंपनी की कई संपत्तियां हैं, जिनके लिए पिछले वर्ष कब्जा नोटिस जारी हो चुके हैं। इसमें एक ही अपार्टमेंट में कंपनी की अलग-अलग फ्लोर पर कई संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों को बैंक में ऋण के सापेक्ष जमानत के तौर पर रखा गया था।

एक और बड़े बैंकिंग घोटाले का पर्दाफाश, कानपुर के हीरा कारोबारी पर सीबीआइ का छापा

Posted By: Abhishek

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