कानपुर में साइबर ठगी की जांच से बढ़ी मुसीबतें, 9 महीने में 5500 बैंक खाते फ्रीज होने से कारोबार ठप
कानपुर में साइबर ठगी की जांच के चलते नौ महीनों में 5500 बैंक खाते फ्रीज हुए हैं, जिससे कारोबारियों और ...और पढ़ें

ये तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।
जागरण संवाददाता, कानपुर। डिजिटल लेनदेन के दौर में साइबर ठगी की जांच कारोबारियों और आम खाताधारकों की बड़ी मुसीबत बनती जा रही है।
साइबर अपराध से जुड़ी रकम की कड़ियां तलाशने में पुलिस की कार्रवाई का असर यह है कि खाते में अनजान स्रोत से कुछ रुपये आने पर भी खाता फ्रीज हो जाता है। इससे व्यापारियों के लाखों रुपये के भुगतान अटक रहे हैं और कारोबार प्रभावित हो रहा है।
साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, इस वर्ष एक जनवरी से सितंबर तक शहर के विभिन्न थानों में साइबर ठगी के करीब 255 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 92 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हुई। इस दौरान करीब 5500 बैंक खाते फ्रीज कराए गए। इसमें 1.25 करोड़ रुपये फ्रीज हुए और 24 लाख रुपये की बरामदगी हुई।
बीते पूरे वर्ष 429 मुकदमों में 41.97 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज हुई थी और 4.45 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। इसमें सर्वाधिक मामले बचत खातों से संबंधित हैं लेकिन व्यापारियों के बैंक खाते भी संदिग्ध लेनदेन पर फ्रीज किए जा रहे हैं।
एक रुपये के चक्कर में ढाई साल से फ्रीज खाता
स्वरूप नगर निवासी अंबिका कपूर के अनुसार, दो अप्रैल 2024 को उनके एचडीएफसी बैंक खाते में कहीं से एक रुपया आया था। इसके बाद क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट मैनेजर के खाते से 1.80 लाख रुपये निकले और इस मामले में पुलिस ने उनका बैंक खाता फ्रीज करा दिया।
तब से अब तक खाते पर लगी रोक नहीं हटा सकी है। अंबिका की तरह कई छोटे दुकानदार भी इसका शिकार बने हैं। इसी तरह नेहरू नगर के इलेक्ट्रानिक्स कारोबारी के खाते में 2500 रुपये आए तो पुलिस ने उनका खाता भी फ्रीज करा दिया। रतनलाल नगर निवासी कर्मचारी के खाते में 1500 रुपये आए तो कई महीनों तक उनका बचत खाता फ्रीज रहा।
अनजाने में साइबर ठगों के खेल में फंसने वाले कारोबारियों को बचाने के लिए पुलिस को खाते फ्रीज कराने के बजाय अन्य उपायों पर ध्यान देना चाहिए। फ्रीज होने से कर्मचारियों का वेतन, दुकान का किराया और बिजली बिल जैसे खर्च भी अटक जाते हैं। चेक बाउंस होने या भुगतान में देरी से कारोबारी की साख पर भी असर पड़ता है।
- सुनील बजाज, जिलाध्यक्ष, कानपुर उद्योग व्यापार मंडल उत्तरीसाइबर अपराध की जांच में पुलिस या साइबर सेल के निर्देश पर संदिग्ध खाते पर रोक लगाई जाती है। रोक हटवाने के लिए खाताधारक को संबंधित जांच अधिकारी से संपर्क कर लेनदेन की वैधता के प्रमाण देने पड़ सकते हैं। खाताधारक बैंक से रोक का कारण, संबंधित पुलिस इकाई और शिकायत के बारे में जानकारी ले सकते हैं।
- आदित्य चंद्रा, लीड बैंक मैनेजर
खाता फ्रीज हो जाए तो क्या करें
- खाता फ्रीज होने की जानकारी मिलते ही तुरंत अपनी बैंक शाखा जाएं। वहां से कार्रवाई का कारण, किस पुलिस थाने अथवा साइबर सेल के निर्देश पर रोक लगी है, उसका संदर्भ नंबर और जांच अधिकारी की जानकारी लें।
- संबंधित साइबर थाने या जांच अधिकारी को लिखित प्रार्थना पत्र देकर बताएं कि आपके खाते में आई संदिग्ध रकम वैध व्यापारिक लेन-देन या अनजाने में आई है और आपका किसी साइबर अपराध से संबंध नहीं है।
- आवेदन के साथ अपनी पहचान का प्रमाण, पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और जिस सामान या सेवा के बदले वह रकम आई थी, उसका पक्का बिल/इनवाइस साक्ष्य के रूप में संलग्न करें।
