कानपुर, जागरण संवाददाता।  देश के 74 कृषि विश्वविद्यालयों में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) नैक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल) से बी ग्रेड मान्यता पाने वाला देश का पहला संस्थान बन गया है। कानपुर स्थित सीएसए कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने वाले शोध कार्य, बेहतर संसाधन व समन्वय सहित कृषि विज्ञानियों के अनुभव व मेधावी छात्रों की मेहनत के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। नैक से बी ग्रेड मान्यता मिलने के बाद मंगलवार को विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीआर सिंह व रजिस्ट्रार प्रो. सीएल मौर्या, कृषि विज्ञानियों व कर्मचारियों, विद्यार्थियों में दोगुनी खुशी दिखाई दी। यह उपलब्धि मिलने के बाद विश्वविद्यालय को यूजीसी से बजट मिलने के रास्ते खुल गये हैं। 

विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीआर सिंह  ने बताया कि नैक ग्रेडिंग के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पूरी तैयारी कर आवेदन किया था। नैक की टीम ने 27 से 29 जून के बीच परिसर में कई मानकों पर बारीकी से परीक्षण व मूल्यांकन किया। छात्र, पूर्व छात्र, वैज्ञानिकों व शिक्षकों से संवाद कर अध्यापन कार्य की गुणवत्ता को परखा। संसाधन से लेकर प्रयोगशाला व कक्षा का निरीक्षण किया। शोध व अन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। नैक की टीम ने पूरा परीक्षण करने के बाद पांच जुलाई को ग्रेड जारी कर दिया। उन्होंने बताया कि नैक मान्यता मिलने के बाद अब नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ) से मान्यता लेने के लिए तैयारी करने का फैसला लिया है। 

नैक ग्रेडिंग के बारे में जानें

नैक यूजीसी का एक हिस्सा है। इसका काम देशभर के विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों, निजी संस्थानों में गुणवत्ता को परखना और उनको रेटिंग देना है। यूजीसी की नई गाइडलाइन के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिएशन काउंसिल से मान्यता प्राप्त करना जरूरी है। अगर किसी संस्थान ने इसकी मान्यता नहीं ली है तो उसे किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। 

क्या है ग्रेडिंग प्रक्रिया

सबसे पहले शिक्षण संस्थान नैक की गुणवत्ता पर खरा उतरने के लिए तैयारी करते हैं। इसके बाद संस्थान नैक ग्रेडिंग के लिए आवेदन करते हैं। आवेदन करने के बाद नैक की टीम संस्थान का दौरा करती है। उसका निरीक्षण करती है। इस दौरान टीम कालेज में शिक्षण सुविधाएं, नतीजे, इंफ्रास्ट्रक्चर और कालेज का माहौल जैसे अन्य बिंदुओं का निरीक्षण करती है। इसी आधार पर नैक की टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। इसमें कालेज को सीजीपीए दिया जाता है और इसी के आधार पर ग्रेड जारी होते हैं। 

ग्रेड चार साल के लिए मान्य

नैक के तहत कॉलेजों को चार साल के लिए ग्रेड दिए जाते हैं। चार साल बाद फिर से रेटिंग दी जाती है। नैक ने अस्थायी ग्रेड देने की भी व्यवस्था की है। इसके तहत दो साल के लिए ग्रेड दी जाएगी। अगर कोई कालेज प्रबंधन ग्रेड से संतुष्ट नहीं है तो छह महीने में कमियों को दूर करके दोबारा निरीक्षण करवा सकता है। लेकिन इसके लिए 10 हजार का शुल्क जमा करना होगा। इसके तहत ये ग्रेड सिर्फ दो साल के लिए मान्य होगी।

 स्टूडेंट्स को ये होगा फायदा

नैक रेटिंग से स्टूडेंट्स को शिक्षण संस्थान के बारे में सही जानकारी मिलती है। छात्रों को संस्थान के बारे में शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान, बुनियादी ढांचा और संसाधन जैसी जानकारी हासिल करने में आसानी होती है। नैक ग्रेडिंग के जरिए छात्र अपने लिए बेहतर कालेज तलाश कर सकते हैं। इतना ही नहीं, नैक ग्रेड शिक्षण संस्थानों की दी गई डिग्रियों का मूल्य भी निर्धारित करते हैं। 

यूजीसी से भी अब बजट मिलने की उम्मीद

मीडिया प्रभारी डा. खलील खान ने बताया कि नैक से ग्रेड मिलने के बाद चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी से भी बजट मिलने की उम्मीद है। यूजीसी विभिन्न शोध कार्यो के लिए विश्वविद्यालय को प्रोजेक्ट व बजट दे सकता है।

Edited By: Abhishek Verma