जागरण संवाददाता, कानपुर : केंद्रीय वायु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के चक्कर में कानपुर और यहां की जनता पिस रही है। जनपद में वायु प्रदूषण का वास्तविक आकलन नहीं हो पा रहा है।

नेहरू नगर में ऑटोमैटिक मानीट¨रग स्टेशन बना हुआ है। यहां से हर आधे घंटे में जहरीली गैसों की ऑनलाइन जानकारी मिलती है। इंटरनेट पर नेहरू नगर स्टेशन सीपीसीबी का लिखकर आता है, जबकि उसके अधिकारी इसे यूपीपीसीबी का बताते हैं। वहीं यूपीपीसीबी के अफसर सीपीसीबी का बताकर पल्ला झाड़ते हैं। इसी का खामियाजा है कि मानीट¨रग स्टेशन की समय पर सर्विसिंग नहीं होती है। हवा की गुणवत्ता मापने वाले सेंसर भी रिकैलिब्रेट नहीं हो पाते हैं। कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ), सल्फर डाईऑक्साइड (एसओटू), नाइट्रोजन डाईऑक्साइड (एनओटू), पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 व पीएम 10) की मात्रा कभी एकदम ज्यादा हो जाती है, तो कभी एकदम कम। सीपीसीपी के आंकड़ों में कानपुर का नाम देश के पांच सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में रहता है। कई बार तो पहले नंबर पर पहुंच चुका है।

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क्षेत्रफल के हिसाब से स्टेशन कम

जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 3155 वर्ग किमी है। उसके अनुपात में यहां पर मानीट¨रग स्टेशन कम हैं। नेहरू नगर का मानीट¨रग स्टेशन ब्रह्मानगर चौराहे पर स्थित है। वहीं यूपीपीसीबी के मैनुअल मानीट¨रग स्टेशन जरीबचौकी, पनकी साइट नंबर वन, शास्त्री नगर, आवास विकास कल्याणपुर और किदवई नगर में हैं।

किदवई नगर स्टेशन छह माह से खराब

किदवई नगर मानीट¨रग स्टेशन छह माह से खराब है। यह आवासीय क्षेत्र में बनाया गया है। जरीब चौकी का कार्मशियल, पनकी का इंडस्ट्रियल, शास्त्री नगर व कल्याणपुर का स्टेशन आवासीय क्षेत्र में स्थित है।

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बोर्ड ने एडवाइजरी जारी कर पल्ला झाड़ा

शहर की खराब वायु के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रशासन, वन विभाग, केडीए, नगर निगम, केस्को, पीडब्लूडी, आवास विकास को एडवाइजरी जारी कर पल्ला झाड़ लिया। आज भी जगह जगह कूड़ा जलाया जा रहा है। सड़क पर धूल का गुबार उड़ता है। निर्माण सामग्री खुले में रखी जा रही है।

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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक गैसें

सीपीसीबी के मानीट¨रग स्टेशन से वायु गुणवत्ता सूचकांक पीएम 2.5 की मात्रा नापी जाती है, जबकि मैनुअली में पीएम 10 की रिपोर्ट आती है। दोनों ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। पीएम 2.5 फेफड़ों को सीधे नुकसान पहुंचाता है, जबकि पीएम 10 से गले व श्वांस नली में संक्रमण होता है। एसओटू, एनओटू, सीओ गैस भी हानिकारक होती हैं।

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दोनों के डाटा में अंतर

मैनुअली स्टेशन में आठ घंटे फिल्टर लगाकर रखा जाता है। उस दौरान वायु में फैली गैसों का आकलन किया जाता है। ऑटोमैटिक मानीट¨रग स्टेशन में सेंसर लगे होते हैं। यह छोटे से छोटे धुएं के छल्ले तक को रिकार्ड कर लेता है। दोनों के डाटा में 20 से 25 वैल्यू का अंतर रहता है।

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जाम प्रभावित और अत्यधिक व्यस्त क्षेत्र छूटे

जनपद में 12 लाख से अधिक दोपहिया और चार पहिया वाहन हैं। कई ऐसे हिस्से अति व्यस्त क्षेत्र हैं, जहां रोज जाम लगता है। इन हिस्सों में प्रदूषण मापक यंत्र नहीं लगे हैं। रामादेवी चौराहा, हरजेंदर नगर चौराहा, टाटमिल, अफीमकोठी, बारादेवी, नौबस्ता, बर्रा बाईपास, यशोदा नगर, सीटीआइ, दादा नगर, चुन्नीगंज, परेड, बड़ा चौराहा, सिविल लाइन, कंपनी बाग चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा, कल्याणपुर क्रासिंग आदि में ट्रैफिक काफी रहता है। जाम की वजह से गाड़ियों से जहरीला धुआं निकलता है।

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अधिकतम एक किमी रहती क्षमता

प्रदूषण विभाग के विशेषज्ञों की मानें तो मानीट¨रग स्टेशन में लगे सेंसर की अधिकतम क्षमता एक किमी क्षेत्र तक ही सीमित रहती है। वहीं मैनुअली स्टेशन के फिल्टर की क्षमता आधा किमी रहती है।

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नेहरू नगर मानीट¨रग स्टेशन की देखरेख यूपीपीसीबी कर रहा है। सेंसर के रिकैलिब्रेट की जिम्मेदारी वहीं के स्टाफ की है। मानीट¨रग स्टेशन बढ़ाने पर विचार चल रहा है।

-एसके गुप्ता, जोनल डायरेक्टर सीपीसीपी

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यूपीपीसीबी के अपने मानीट¨रग स्टेशन हैं। मुख्यालय से नेहरू नगर स्टेशन के संचालन के कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। वहां की देखरेख सीपीसीबी द्वारा हो रही है।

-कुलदीप मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी यूपीपीसीबी

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सीपीसीबी ने निजी कंपनी को आउटसोर्स किया है। वह सिर्फ रिपोर्ट जारी करते हैं। मानीट¨रग स्टेशन के सेंसर को रिकैलिब्रेट करने की जिम्मेदारी सीपीसीबी की है।

-चित्रा श्रीवास्तव, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी यूपीपीसीबी

Posted By: Jagran

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