कानपुर, जेएनएन। कांग्र्रेस से निष्कासित पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायकों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्र्रेस को नेता प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चला रहे हैं। गांधी-नेहरू के तमाम सिद्धांतों को दरकिनार कर पार्टी को जेएनयू कांग्र्रेस बना दिया है। वे उर्सला अस्पताल में कानपुर देहात के मंगटा गांव में मारपीट में हुए घायलों से मिलने उर्सला अस्पताल भी गए।

पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व सांसद डॉ. संतोष सिंह, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा, नेकचंद पांडेय, पूर्व विधान परिषद सदस्य सिराज मेहंदी, प्रदेश उपाध्यक्ष अनुसुइया शर्मा, प्रदेश के पूर्व महासचिव संजीव सिंह ने आरोप लगाए कि कुछ तथाकथित वामपंथी कांग्र्रेस नेतृत्व को गुमराह कर संगठन पर कब्जा कर रहे हैं। पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को बंधुआ मजदूर की तरह अपमानित किया जा रहा है। उनके मुताबिक वे लोग देश की सबसे पुरानी पार्टी को बचाने का अभियान चला रहे हैं लेकिन, इस समय पार्टी के संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। तानाशाही तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं।

कांग्र्रेस में आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह विलुप्त हो गया है। अपराधी किस्म के लोगों को जिम्मेदार पदों पर बैठाया जा रहा है। ये लोग अनुशासन के नाम पर मनमानी कर रहे हैं और नेताओं को असंवैधानिक तरीके से निष्कासन के नोटिस थमाए जा रहे हैं। दिल्ली के चुनाव में 66 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। मात्र चार फीसद वोट हासिल करने के बाद भी नेता खुशी मना रहे हैं।

पत्रकार वार्ता के बाद सभी उर्सला अस्पताल में मंगटा गांव के घायलों से मिलने पहुंचे। तीमारदारों ने उन्हें बताया कि जिस खौफनाक तरीके से उनके साथ मारपीट की गई, उसकी रिपोर्ट बहुत हल्की धाराओं में पुलिस ने लिखी। नेताओं ने घायलों को फल बांटे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस घटना में रासुका लगाई जानी चाहिए ताकि हमलावरों पर दबाव बने।

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