जागरण संवाददाता, कानपुर : यह वही रेव थ्री मॉल का सिनेमा कार्निवाल था, जहां हर दिन मनोरंजन का मेला लगता है लेकिन शुक्रवार को कुछ खास था। माहौल की खासियत थी कि यह सिल्वर स्क्रीन से जुड़ी हुई उस पारंपरिक सोच को आईना दिखा रहा था कि करोड़ी क्लब में शामिल फिल्में ही दर्शकों को आकर्षित करती हैं। यहां उन सिने प्रेमियों की भीड़ उमड़ी थी जो इस बात को साबित कर रही थी कि ऐसे दर्शकों की संख्या भी बहुतायत में है जो उन फिल्मों के भी दीवाने हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर चमकने का मौका हासिल नहीं कर पाती हैं। हां, शर्त यही कि सिनेमा सार्थक हो, संदेश सार्थक हो। सिने प्रेमियों को अपनी इस चाहत को पूरी करने का मौका दैनिक जागरण के फिल्म फेस्टिवल में मिला।

अपने नौवें संस्करण में पहुंचे जागरण फिल्म फेस्टिवल का शुक्रवार को रेव थ्री मॉल के कार्निवाल सिनेमा में आगाज हो गया। दुनियाभर के बेहतरीन लेखक, निर्देशक और अदाकारों की फिल्मों के माध्यम से समाज को सार्थक संदेश देने वाली फिल्में एक बार फिर से सिने प्रेमियों के मनोरंजन के लिए तैयार होकर स्क्रीन पर आ गई हैं। आठ वर्षो से जागरण फिल्म फेस्टिवल सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर की फिल्मों के लिए सशक्त मंच बना हुआ है। मसाला फिल्मों की तुलना में स्क्रीन हासिल करने में पीछे रहने वाली ये कला फिल्में सिनेमा का अर्थ सार्थक करती हैं। रियल लाइफ को रील लाइफ से जोड़ती हैं। वर्ष भर जागरण फिल्म फेस्टिवल का इंतजार करने वाले दर्शकों को इसके आगाज के दिन शाम छह बजने का बड़ी से बेसब्री से इंतजार था। कई सारे सिने प्रेमी ऐसे थे जो शाम चार बजे से ही रेव थ्री मॉल पहुंच गए। दर्शकों के इसी प्यार से 12 शहरों से शुरू होकर आज जेएफएफ अपने नौंवे संस्करण में 18 शहरों तक पहुंच चुका है।

फिल्म शुरू होते ही दर्शकों की वह भीड़ हॉल के अंदर थी जो तेज संगीत पर झूमने वाली नहीं बल्कि निर्देशक की सोच, कलाकार की कला का बारीकी से आकलन कर रही थी। यह फेस्टिवल हर वर्ष किसी न किसी फिल्मी हस्ती से भी दर्शकों को रूबरू करवाता है। मुक्काबाज फिल्म के बाद ¨हदी की शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया गया जिनमें जान जिगर, लुका छुपी, बिस्मार घर, ऐडरिफ्ट और माया शामिल थीं। सभी फिल्मों को दर्शकों ने खूब सराहा।

Posted By: Jagran