कानपुर, जेएनएन। सीआइडी अधिकारी बताकर बिरहाना रोड पर चोकर कारोबारी के कर्मचारी के बैग से चेकिंग के बहाने 5.15 लाख रुपये पार करने वाले ईरानी गैंग के सदस्य थे। सीसीटीवी कैमरे में जो बाइक सवार चार युवक कैद मिले थे, उनमें से दो का हुलिया ईरानी गैंग के बदमाशों से मिल रहा है। इसी गैंग के चार बदमाश दो वर्ष पूर्व गिरफ्तार किए गए थे। तब लाखों के जेवर, नकदी आदि सामान बरामद हुआ था।

एक नवंबर को कारोबारी के कर्मचारी रंजीत बैग में 8.75 लाख रुपये लेकर बैंक में जमा करने निकले थे। रास्ते में बाइक सवार दो युवकों ने खुद को सीआइडी अधिकारी बताकर रोका और बैग चेक करने के बहाने 5.15 लाख रुपये चोरी करके फूलबाग की ओर भागे थे। पुलिस ने रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई तो पता लगा कि उनके पीछे उनके दो और साथी भी थे। एएसपी निखिल पाठक ने बताया कि वारदात के पीछे ईरानी गैंग का हाथ प्रतीत हो रहा है। वर्ष 2018 में इस गैंग के चार बदमाशों राजस्थान बारा निवासी अनवर मिर्जा, रियासत खान, पिल्लौर हुसैन व महाराष्ट्र जलगांव के मो. अली को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि पांच बदमाश भोपाल निवासी अब्बास, रशीद, पठान, हैदर और शाबिर फरार हो गए थे। उस वक्त कई वारदात का राजफाश हुआ था। आरोपितों ने बताया था कि उनके पूर्वज ईरान से आए थे, इसीलिए गैंग का नाम ईरानी रखा।

दो वर्ष पूर्व की थीं ये घटनाएं

आरोपितों ने दो वर्ष पूर्व कलक्टरगंज में सर्राफ प्रमोद कुमार के बैग से सीबीआइ अधिकारी बताकर चेङ्क्षकग के बहाने 260 ग्राम सोने के जेवरात पार कर दिए थे। इससे पूर्व उन्होंने फीलखाना में प्रापर्टी डीलर के पिता रामकृष्ण सोनकर को एसटीएफ अधिकारी बताकर सोने की चेन व आठ अंगूठियां, बादशाहीनाका क्षेत्र में वृद्धा ऊषा रस्तोगी से पहने हुए जेवर, हरबंशमोहाल में विजय राठौर से 68 हजार रुपये और कोतवाली में महिला से चेन ठग ली। 

वारदात से पहले खरीदते थे नए वाहन

टप्पेबाज इतने शातिर हैं कि हर वारदात से पूर्व नया ठिकाना बनाते थे और नए वाहन खरीदते थे। वारदात के बाद वाहन सस्ते दाम में बेचकर फरार हो जाते हैं। इनके कई साथी वारदात से पूर्व होटलों में आकर ठहरते हैं। घटना के बाद उस जिले को छोड़कर दूसरे जिले में जाते हैं और वहां भी रेकी करने के बाद वारदात को अंजाम देते हैं। पुलिस पूर्व में जेल भेजे गए शातिरों की भी तलाश कर रही है। उनकी जेल से जमानत हो चुकी है। 

Edited By: Shaswatg