घाटमपुर (कानपुर), जागरण संवाददाता। खनन से जुड़े लोकेशन माफिया के खेल में शामिल कानपुर आउटर के दारोगा सूर्यदेव चौधरी, और दो सिपाहियों अनमोल तिवारी और यतिन को शासन की जांच के बाद दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया। 

अगस्त 2021 के इस मामले में खनन विभाग की टीम की लोकेशन दे रहे कार सवारों के खिलाफ खनन अधिकारी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने माफिया को बचाने के लिए विवेचना में खेल कर दिया। मौके पर पकड़ा गया मोबाइल पुलिस ने गायब कर दिया। दावा है कि मोबाइल पुलिस गायब नहीं करती तो गिरोह से जुड़े कई अन्य लोग भी बेनकाब हो जाते। 

18 अगस्त 2021 में भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय लखनऊ के निर्देश पर जिला खनन अधिकारी केबी सिंह कानपुर-सागर हाईवे पर टीम के साथ गए थे। वह अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों की जांच के लिए निकले थे। साथ में पुलिस टीम में सजेती एसओ रावेंद्र मिश्रा, उनके हमराही सिपाही अनमोल तिवारी और यतिन व एसआई सूर्यदेव तिवारी थे। रात में एक कार लगातार उनका पीछा कर रही थी। उनके निर्देश पर पुलिस ने कार सवारों का पकड़ा तो पता चला कि वे खनन विभाग की टीम की लोकेशन हमीरपुर, कानपुर और लखनऊ तक के ट्रक चालकों और ट्रांसपोर्टरों को दे रहे थे। 

ताकि ओवरलोड वाहनों को टीम से बचाकर निकाला जा सके। उनके पास मिले मोबाइल फोन में सभी जगहों के ट्रांसपोर्टर और चालक जुड़े थे और वायस नोट के जरिए सूचना भेजी जा रही थी। केबी सिंह ने कार सवार अमौली निवासी कुबेर सिंह, घाटमपुर के जवाहरनगर पूर्वी मोहल्ला निवासी राजकुमार के साथ ही वाट्सएप ग्रुप से जुड़े 55 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक सूर्यदेव चौधरी थे। लिखा पढ़ी में बरामद किए गए मोबाइल का जिक्र था, लेकिन बाद में उसे गायब कर दिया गया। इसी वजह से शासन ने जांच कराई और दोषी पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई। सूर्यदेव चौधरी सजेती थाने में तैनात थे, जबकि दोनों सिपाही महाराजपुर थाने में तैनात थे।

आरोपित 55 में एक तक भी पुलिस नहीं पहुंची

रिपोर्ट में आरोपित बनाए गए वाट्सएप ग्रुप के 55 लोगों में एक के पास तक भी पुलिस नहीं पहुंच सकी है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के बाद यह पता लगाने की कोशिश ही नहीं कि कि आखिर वह 55 लोग कौन थे, जो खनन विभाग की कार्रवाई की लोकेशन खनन माफिया तक पहुंचा रहे थे। दावा है कि आरोपित 55 लोगों की सारी जानकारी उसी मोबाइल में थी, लेकिन मोबाइल ही गायब कर दिए जाने की वजह से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके पीछे बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि अगर यह गिरोह पकड़ा जाता, जो कई थानों में छिपे खनन माफिया के दोस्त पुलिस वालों के चेहरे भी सामने आ जाते। 

थाने से मिल गई थी जमानत

जिला खनन अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने सभी पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और धोखाधड़ी करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस खनन से जुड़े इस खेल में किस तरह से शामिल थी, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपित कुबेर सिंह और राजकुमार को थाने से ही जमानत मिल गई थी। तब के सजेती थाने के एसओ रहे और वर्तमान में झांसी में तैनात रावेंद्र मिश्रा ने बताया कि जिन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई उनमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान के चलते थाने से ही जमानत दी गई थी। हालांकि उस वक्त रावेंद्र मिश्रा की भूमिका भी सवालों के घेरे में थी।

Edited By: Abhishek Verma