महोबा, जेएनएन। Mahoba Kabrai Kand बीते साल सात सितंबर 2020 को तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार व कबरई के तत्कालीन एसओ देवेंद्र शुक्ला पर क्रशर कारोबारी इंद्रकांत ने वसूली का आरोप लगाया था। उनसे जान को खतरा बताते हुए आडियो व वीडियो वायरल किया था। मामले में मुख्यमंत्री को प्रार्थनापत्र भी भेजा था। आठ सितंबर को इंद्रकांत गोली लगने से अपनी गाड़ी में घायल मिले थे। 13 सितंबर को कानपुर के एक नर्सिंगहोम में उनकी मौत हो गई थी। कारोबारी के भाई रविकांत त्रिपाठी ने पूर्व एसपी व थाना प्रभारी सहित चार लोगों के खिलाफ कबरई थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में एसआइटी जांच में सिपाही अरुण यादव का नाम भी जोड़ा गया था। मुख्य आरोपित निलंबित और भगोड़ा आइपीएस मणिलाल पाटीदार अभी भी फरार है। 

यहां आया कहानी में नया मोड़: इस मामले में 10 दिन पहले एक नया मोड़ तब आया जब आरोपित बर्खास्त सिपाही अरुण यादव के चचेरे भाई नीलेश ने धमकी भरी पोस्ट 'हमसे और हमारे परिवार से दुश्मनी मत लेना, क्योंकि हम लोगों को भगवान के दर्शन बहुत जल्द करवा देते हैं' डाली थी। इसी तरह आरोपित के सगे भाई नीरज ने पोस्ट डाली कि 'वक्त जब आंखें फेर लेता है तो शेर को भी कुत्ता घेर लेता है, क्योंकि कमजोर हम नहीं हमारा वक्त है वक्त को वक्त दो, क्योंकि वक्त आने में वक्त लगता है।' इस पर कारोबारी के भाई विजय त्रिपाठी ने एसपी सुधा सिंह को तहरीर देकर आरोपितों के खिलाफ कबरई थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। कबरई थाना प्रभारी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि नीरज व नीलेश पर धमकाने का मुकदमा लिखा गया था। विवेचना दारोगा महेंद्र सिंह तोमर कर रहे हैं। दोनों आरोपितों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया है। 

आरोपित सिपाही के अन्य स्वजन पर भी हैं मुकदमे: आरोपित बर्खास्त सिपाही का भाई नीरज प्रतापगढ़ में जीआरपी में आरक्षी है। आरोपित नीलेश चचेरा भाई है, वह गांव कुशगंवा अहिरान निवाड़ी कला थाना बकेवर इटावा में रहता है। आरोपित अरुण, नीरज तथा हमीरपुर पुलिस लाइन में सिपाही उसके चाचा रघुराज सिंह, छोटा चाचा अनिल, पिता ध्यानसिंह के खिलाफ औरैया निवासी विकास कुमार ने अक्टूबर 2020 में सदर कोतवाली महोबा में नौकरी के नाम पर पांच लाख रुपये ठगी करने का मुकदमा लिखाया था। इसी साल सात जुलाई को बर्खास्त सिपाही पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन निरीक्षक झांसी सुरेंद्र सिंह ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा सदर कोतवाली महोबा में दर्ज कराया था।

Edited By: Shaswat Gupta