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अमेरिकी टैरिफ की बाधा तोड़ आगे निकला कानपुर का चमड़ा उद्योग, लेदर गारमेंट्स ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार

Published: Mon, 25 May 2026 02:17 PM (GMT+05:30)

अमेरिकी टैरिफ की चुनौतियों के बावजूद भारतीय चमड़ा उद्योग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2.62% की वृद्धि दर्ज की, कुल निर्यात ₹41,901.90 करोड़ रहा।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीरें को एआई टूल की मदद से बनाई गई हैं।

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संक्षेप में पढ़ें

अखिलेश तिवारी, कानपुर। लेदर और लेदर गुड्स के निर्यातकों ने एक बार फिर अपना डंका बजा दिया है। अमेरिका के टैरिफ वार ने बीते वित्तीय वर्ष में पूरी दुनिया के कारोबार को नकारात्मक दिशा दी। भारत की निर्यात राह में भी कांटे बिछाए लेकिन निर्यातकों के जुनून ने सभी बाधाओं को धता बता दिया है।

कानपुर, आगरा, कोलकाता, चेन्नई समेत देश के सभी प्रमुख लेदर निर्यातक क्षेत्रों ने बीते साल में जमकर निर्यात किया और साल भर के दौरान 2.62 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज कराई है।

कानपुर के सैडलरी और हारनेस निर्यात की छलांग भी 11 प्रतिशत से ज्यादा ऊंची रही है। इस साल देश के चर्म निर्यातकों ने 41 हजार 901 करोड़ रुपये का निर्यात किया है जो एक साल पहले के निर्यात से एक हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।

वैश्विक बाजार की चुनौतियों के बीच भारत के चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सकारात्मक प्रदर्शन किया है।

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अप्रैल-मार्च 2025-26 के दौरान देश से चमड़ा, चमड़े के उत्पाद और फुटवियर का कुल निर्यात 41,901.90 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के 40,833.59 करोड़ रुपये की तुलना में 2.62 प्रतिशत अधिक है।

देश के चर्म निर्यात के आंकड़े पिछले सप्ताह जारी किए गए हैं। चर्म निर्यात परिषद से मिले आंकड़ों के अनुसार लेदर गारमेंट्स के निर्यात में सबसे अधिक 22.97 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वर्ष 2024-25 में जहां इसका निर्यात 2,989.12 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 3,675.70 करोड़ रुपये पहुंच गया।

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सैडलरी और हार्नेस के निर्यात में कानपुर का है दबदबा

चर्म निर्यात में कानपुर के निर्यातकों का पूरी दुनिया में दबदबा है। सैडलरी एंड हार्नेस श्रेणी में निर्यात के आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं। बीते साल के दौरान इस श्रेणी में 11.93 प्रतिशत तथा नान-लेदर फुटवियर में 8.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

नान-लेदर फुटवियर का निर्यात 2,142.58 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,317.22 करोड़ रुपये हो गया। फुटवियर कंपोनेंट्स के निर्यात में भी 7.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं लेदर फुटवियर, जो उद्योग का सबसे बड़ा निर्यात खंड माना जाता है, उसमें 1.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली। इसका निर्यात 16,978.15 करोड़ रुपये से बढ़कर 17,164.09 करोड़ रुपये हो गया।

फिनिश्ड लेदर का निर्यात गिरा

कुछ क्षेत्रों में गिरावट भी दर्ज की गई। फिनिश्ड लेदर के निर्यात में 6.67 प्रतिशत और लेदर गुड्स में 0.89 प्रतिशत की कमी आई। फिनिश्ड लेदर का निर्यात 3,764.18 करोड़ रुपये से घटकर 3,512.96 करोड़ रुपये रह गया, जबकि लेदर गुड्स 11,157.53 करोड़ रुपये से घटकर 11,057.73 करोड़ रुपये पर आ गया।

निर्यात के बढ़े हुए आंकड़े वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण हैं। मुक्त व्यापार समझौतों से आने वाले समय में निर्यात को और गति मिलने वाली है।

-मुख्तारुल अमीन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद

 

चर्म निर्यातकों के लिए गर्व का अवसर है। अमेरिकी बाधाओं के बावजूद सरकार की कोशिशों से उद्योग ने वृद्धि दर हासिल की है। अब नए साल में 10 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।

-यादवेन्द्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष, सीएलई

 

सैडलरी और हार्नेस के अलावा फुटवियर के निर्यात में भी वृद्धि हुई है। लेदर गारमेंट की बढ़ी हुई मांग का असर फैशन एवं डिजाइनिंग क्षेत्र में भी होगा। इससे युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।

-जावेद इकबाल, लेदर फुटवियर निर्यातक

 

अमेरिका के टैरिफ ने पिछले साल निर्यात की रफ्तार धीमी की थी लेकिन इस साल लेदर गुड्स समेत सभी उत्पादों का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। निर्यात के आंकड़े उत्साहजनक हैं।

-प्रेरणा वर्मा, लेदर गुड्स निर्यातक