जागरण संवाददाता, कानपुर : केंद्र सरकार ने कामर्शियल वाहनों में माल ढोने की क्षमता बढ़ा दी है। यह फैसला ट्रांसपोर्टर्स की मांग पर लिया गया था। पहले तो ट्रांसपोर्टर्स इस फैसले से बहुत खुश हुए कि अब ट्रकों में माल अधिक ले जा सकेंगे। लेकिन, अब ट्रांसपोर्टर्स परेशान हैं, क्योंकि अब वे क्षमता से अधिक माल ले जा रहे हैं, इससे तीन हजार से अधिक ट्रक ट्रांसपोर्ट नगर में खाली खड़े हैं। सड़क परिवहन एवं राज्य मार्ग मंत्रालय ने 16 जुलाई से कामर्शियल वाहनों में माल ढुलाई में लोड की क्षमता बढ़ा दी। ट्रांसपोर्टर्स ने इस फैसले का स्वागत किया। नतीजा ये है कि जो माल 20 ट्रकों में जाता था, वह 15 ट्रक में ही सिमटने लगा जिससे बाकी बचे ट्रकों को माल मिलना मुश्किल हो रहा है।

परिस्थितियों का पूरा लाभ व्यापारी भी उठा रहे हैं। कोई ट्रांसपोर्टर्स यदि गोरखपुर का भाड़ा 10 हजार रुपये मांग रहा है तो दूसरा ट्रांसपोर्टर्स उक्त माल को आठ हजार रुपये में ही ले जाने को तैयार है। ऐसा इसलिए है कि ट्रांसपोर्टर्स को ट्रक की किस्त, रोड टैक्स, परमिट का पैसा, चालक और क्लीनर का वेतन भी देना है। प्रति ट्रक हर माह करीब 35 हजार रुपये का खर्च आता है। ट्रकों को भाड़ा नहीं मिलेगा तो ये पूरा खर्च कहां से निकलेगा।

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वाहनों की माल ढोने की क्षमता (ट्रक सहित-टन में)

कितने टायर पहले किलो अब किलो

आठ 16.20 19

10 25 28.5

12 31 36

14 35.20 40

16 37 43.50

18 40.20 46

22 49 55

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ओवरलोड क्षमता बढ़ाने से ट्रांसपोर्टर्स के लिए नई मुसीबत पैदा हो गई है। अब 20 ट्रक का माल 15 ट्रक में जा रहा है। ऐसे में पांच ट्रक को कोई माल ही नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि भाड़ा भी 10 प्रतिशत तक कम लेने की मजबूरी है। जल्द ही इसके खिलाफ ट्रांसपोर्ट व्यवसायी कोई ठोस रणनीति तैयार करेंगे।

- सतीश गांधी, अध्यक्ष, यूपी मोटर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन

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