कानपुर, जेएनएन। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में ब्लैक फंगस के लक्षण वाले मरीज आने लगे हैं। दो दिन पहले 30 वर्षीय युवक भर्ती हुआ था। उसके बाद से अब तक एक महिला समेत चार और भर्ती हुए हैं। देर शाम एक युवक हैलट इमरजेंसी में भर्ती हुआ, जिसकी आंख की रोशनी पूरी तरह से जा चुकी है। उसकी आंखें एकदम बाहर की तरफ आ चुकी हैं। इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि स्वाब का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। अगर फंगस का इंफेक्शन खून में पहुंच गया तो जान बचाना मुश्किल होगा। उधर, प्राचार्य ने ब्लैक फंगस के लक्षण के मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग वार्ड सुरक्षित कर दिया है।

सटीक जांच के लिए एमआरआइ व बायोप्सी जरूरी : प्राचार्य प्रो. आरबी कमल ने बताया कि ब्लैक फंगस की तैयारी को लेकर लखनऊ के संजय गांधी आयुर्वेदिक संस्थान (एसजीपीआइ) के विशेषज्ञों ने वेबिनार का आयोजन किया था। उसमें ब्लैक फंगस की पुष्टि के लिए रेडियोलॉजिकल एवं पैथालॉजिकल जांच का सुझाव दिया है। प्राचार्य के मुताबिक रेडियोलॉजिकल जांच में एमआरआइ और पैथालॉजिकल जांच में बायोप्सी लेकर उस अंग के टिश्यू की माइक्रोबायोलॉजी विभाग में माइक्रोस्कोपिक जांच कराना जरूरी है। इससे ही फंगल इंफेक्शन की सटीक जानकारी हो पाती है। इसलिए बायोप्सी के लिए अलग टीम बनाई गई है।

बायोप्सी लेने को बनाई विशेषज्ञों की टीम : प्रो. आरबी कमल ने बताया कि बायोप्सी लेने के लिए हैलट इमरजेंसी के पहले फ्लोर स्थित न्यूरो सर्जरी ओटी को रिजर्व किया गया है, जहां ब्लैक फंगस के लक्षण वाले पीडि़तों की बायोप्सी ली जाएगी। बायोप्सी लेने के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई है, जिसमें नेत्र रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, न्यूरो सर्जन, कार्डियोलॉजी कार्डिक सर्जन एवं एनस्थेटिक को रखा गया है। ब्लैक फंगस के लक्षण वाले पीडि़त का साइनस निकाल कर उससे बायोप्सी लेकर टिश्यू की जांच कराई जाएगी। बायोप्सी के बाद पीडि़तों को न्यूरो के पीओपी वार्ड में रखा जाएगा।

वार्ड नौ में भर्ती होंगे ब्लैक फंगस पीडि़त : प्राचार्य प्रो. आरबी कमल ने बताया कि एमआरआइ एवं बायोप्सी जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि के बाद वार्ड नौ में भर्ती कराया जाएगा। उस वार्ड को सुरक्षित कर दिया गया है। अगर पीडि़त में पुष्टि होगी तो एक्सपर्ट सर्जन की टीम उनकी जान बचाने के लिए उनकी आंख एवं साइनस तत्काल निकालेगी। अगर फंगस ब्लड में पहुंच गया तो जानलेवा साबित होगा।

सर्जरी को तैयार नहीं, इंजेक्शन भी नहीं मिल रहा : ब्लैक फंगस के लक्षण का जवाहर नगर निवासी 30 वर्षीय युवक हैलट में भर्ती है। उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि उसका साइनस एवं आंख निकालना जरूरी है। युवक ऑपरेशन के लिए सहमति ही नहीं दे रहा है। एंटी वायरल इंजेक्शन एमफोटरेसिन बी भी कहीं नहीं मिल रहा है। उसे रोजाना छह इंजेक्शन लगने हैं, जो सात दिन तक लगेंगे। इंजेक्शन नहीं मिलने से संक्रमण तेजी से फैल रहा है। फिलहाल एंटीबायोटिक दवाएं ही चलाई जा रही हैं।

जीएसवीएम में होने लगी ब्लैक फंगस की माइक्रोस्कोपिक जांच : जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) से निपटने की तैयारी युद्धस्तर पर शुरू हो गई है। प्राचार्य की पहल पर शनिवार को माइक्रोबायोलॉजी विभाग में ब्लैक फंगस के लक्षण के मरीजों के स्वाब की माइक्रोस्कोपिक जांच शुरू हो गई। पहले दिन हैलट से सैंपल जांच के लिए भेजे गए, हालांकि उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। उधर, शासन के निर्देश पर प्राचार्य ने सभी जरूरी तैयारियां कर ली हैं, लेकिन इंजेक्शन न मिलने से पीडि़तों के इलाज में अड़चन आ रही है।

बढऩे लगी संख्या : हैलट में ब्लैक फंगस के लक्षण वाले मरीज आने लगे हैं। जिले में सरकारी और निजी क्षेत्र में जांच की सुविधा नहीं है। इस समस्या को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आरबी कमल ने शुक्रवार को माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मधु यादव को जांच की तैयारी करने को एक दिन का समय दिया था। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा व डॉ. मधु ने शनिवार को ही ब्लैक फंगस की जांच की तैयारी पूरी कर ली है। इसके लक्षण वाले मरीजों के नेजल स्वाब के नमूने की माइक्रोस्कोपिक जांच शुरू कर दी है। पहले दिन दो लोगों की जांच की गई।