जागरण संवाददाता, कानपुर : प्रदूषण की मार से जूझ रहे उत्तर भारत में अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर न सिर्फ निगरानी करेगा, बल्कि इसकी रोकथाम के लिए सार्थक प्रयास भी करेगा। यहां प्रदूषण मापक केंद्र स्थापित करने की तैयारी चल रही है, जिसमें वायु, जल, मृदा, ध्वनि समेत अन्य प्रदूषण स्तर की जांच के साथ ही उसके निदान के लिए सुझाव देंगे। केंद्र को एकेडमिक क्षेत्र में बनाने की योजना है। संस्थान के विशेषज्ञ नए क्षेत्रों में शोध करेंगे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) द्वारा भेजे जाने वाले प्रदूषित जल आदि के सैंपल की भी यहां जांच होगी।

सीपीसीबी के अधिकारियों ने दिया प्रस्ताव

छह माह पूर्व आइआइटी के विशेषज्ञों और सीपीसीबी के अधिकारियों के बीच प्रदूषण रोकथाम को लेकर बातचीत हुई थी। इसमें संस्थान से गंगा की निर्मलता और वायु गुणवत्ता आकलन में सहयोग को कहा गया। आइआइटी ने वायु प्रदूषण और गंगा की मॉनीट¨रग के लिए सहमति दी। सीपीसीबी और यूपीपीसीबी ने कई नमूनों को भेजा, जिसकी रिपोर्ट तैयार हो गई। हालांकि इसके लिए किसी खास फैकेल्टी और उनके अंडर में शोधार्थी को नियुक्त करना पड़ता है। सीपीसीबी ने आइआइटी के पास मापक केंद्र बनाने का प्रस्ताव भेजा है।

आइआइटी के विशेषज्ञों ने किए कई शोध

आइआइटी विशेषज्ञों ने हवा, पानी और मृदा के क्षेत्र में कई शोध किए हैं। आइआइटी के दो प्रोजेक्ट यूएसए के सहयोग से चल रहे हैं। सिविल इंजीनिय¨रग के प्रो. मनोज शर्मा ने जहां देश को वायु गुणवत्ता सूचकांक का पता लगाने की सबसे आसान तकनीक दी, वहीं प्रो.सच्चिदानंद त्रिपाठी विदेशों की तर्ज पर सस्ते मॉनीट¨रग स्टेशन तैयार कर रहे हैं। अर्थ विज्ञान के प्रो.इंद्रनील सेन ग्लेशियर पर प्रदूषण के दुष्प्रभाव पर काम कर रहे हैं।

पहले चरण में आइआइटी कानपुर

केंद्र पर उत्तर भारत के कई शहरों की जिम्मेदारी रहेगी। केंद्र सरकार के सहयोग से इसका निर्माण किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक आइआइटी कानपुर के नजदीक कई वायु प्रदूषित शहर आते हैं। इनमें कानपुर, लखनऊ, आगरा, फिरोजाबाद, इलाहाबाद आदि शामिल हैं। जबकि इनमें से अधिकतर के बीचों बीच से गंगा भी गुजरी है। संस्थान में सेंटर बनने के बाद अन्य राज्यों में इसको बनाया जाएगा।

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''आइआइटी में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में काम कर रहा है। कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। प्रदूषण मापक केंद्र को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से बातचीत चल रही है। कई शोध कार्य किए जा सकेंगे।- प्रो. अभय करंदीकर, निदेशक, आइआइटी कानपुर

Posted By: Jagran

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