कानपुर, जेएनएन। रक्षा मंत्रालय में आने वाली शिकायतों का निस्तारण तंत्र और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए मंत्रालय आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर से ई-करार कर सकता है। संस्थान के विशेषज्ञ ऐसा प्रोजेक्ट विकसित करेंगे जो शिकायकर्ताओं की समस्या और परेशानियों का जल्द से जल्द हल कर सके और मॉनीटङ्क्षरग भी बेहतर हो। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग और स्टेटिक्स (सांख्यिकी) की मदद ली जाएगी।

एक साल तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट पर कंम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियङ्क्षरग और मैथमेटिक्स के विशेषज्ञ काम करेंगे। माना जा रहा है कि आज ही मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस, डिपार्टमेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉम्र्स एंड पब्लिक ग्रीवांसेज और आइआइटी कानपुर ई-एमओयू साइन कर सकते हैं। इस दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट फॉर पर्सनल डॉ. जितेंद्र ङ्क्षसह के शामिल होने की संभावना है। आइआइटी की ओर से निदेशक प्रो. करंदीकर, डीएन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट प्रो. एआर हरीश समेत अन्य अधिकारी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं।

यह विशेषज्ञ करेंगे काम

प्रोजेक्ट पर मैथमेटिक्स विभाग के प्रो. शलभ, कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रो. पीयूष राय, प्रो. निशित श्रीवास्तव काम करेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग और स्टेटिक्स से तैयार सिस्टम मिनटों में ये बता सकेगा कि किस तरह की शिकायतें ज्यादा हैं। उन पर त्वरित एक्शन लिया जा सकेगा।

आइआइटी में चल रहे ये बड़े प्रोजेक्ट 

  • 1. साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब : देश में साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में उद्यमिता विकास करने के लिए आइआइटी कानपुर में साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब स्थापित किया गया है। इसमें केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस की ओर से 196 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिली है।
  • 2. जीएनएसएस : आइआइटी में नेशनल जियोडेसी प्रोग्राम के अंतर्गत ग्लोबल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) स्थापित किया जा रहा है, यहां से आकाशगंगा, तारों और अन्य ग्रहों पर नजर रखी जा सकेगी। पृथ्वी की गति की सटीक गणना करना भी संभव होगा।
  • 3. 5 जी नेटवर्किंग : संस्थान में 5 जी की नेटवर्किंग की जा रही है। कुछ दिन पहले ही संस्थान में 5 जी की पहली कॉल और डाटा ट्रांसफर का सफल परीक्षण किया गया था।
  • 4. पर्यावरण संरक्षण पर काम : आइआइटी और ऑस्ट्रेलिया की ला-ट्रोबे यूनिवर्सिटी के साथ मई में करार हुआ था। दोनों मिलकर शहरों और गांवों की प्लाङ्क्षनग करेंगे। पर्यावरण संरक्षण पर काम किया जाएगा।

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