कानपुर, जेएनएन। आइआइटी में छात्रों के कौशल विकास, बाजार की मांग, नौकरी के अवसर और शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए कोर्स में बदलाव को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी सीनेट की बैठक में हुई है। कोर्स को उच्चीकृत कर उन्हें सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन, संचार, मानविकी, अर्थशास्त्र, प्रबंधन, पर्यावरण का पाठ पढ़ाया जाएगा। कार्से में बदलाव का सीधा फायदा छात्रों को मिलेगा और भविष्य में बाजार की मांग के अनुरूप अवसर भी मिलेंगे।

निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि संस्थान ने ऐसे पाठ्यक्रम के माध्यम से समर्थन देने में विश्वास किया है, जो न केवल उनके कौशल को बढ़ाता है, बल्कि नई सदी के इंजीनियर और उद्यमी को तैयार करता है। सीनेट की बैठक छह और सात अक्टूबर को हुई थी। इसमें विभागाध्यक्ष, अंडर ग्रेजुएट एकेडमिक रिव्यू कमेटी (यूजीएआरसी) और अन्य फैकल्टी शामिल हुए। बदलाव के लिए यूजीएआरसी के सदस्यों ने बाजार, कंपनियों की मांग, विदेश की यूनिवर्सिटी व संस्थानों में चल रहे कोर्स का अध्ययन किया। उसकी रिपोर्ट विभागों और शीर्ष अधिकारियों को दी।

ई-मास्टर्स प्रोग्राम की भी हो चुकी शुरुआत

आइआइटी कानपुर द्वारा ई-मास्टर्स प्रोग्राम की भी शुरुआत की जा चुकी है, इसका सत्र पहली एक जनवरी 2022 से शुरू होगा। इसमें सरकारी या निजी कंपनियों में कार्यरत इंजीनियर भी पढ़ाई कर सकेंगे। इस प्रोग्राम में साइबर सिक्योरिटी, कम्यूनिकेशन सिस्टम, कमोडिटी मार्केट्स एंड रिस्क मैनेजमेंट और पावर सेक्टर रेगुलेशन विषय हैं और 60 क्रेडिट और 12 माड्यूल निर्धारित पाठ्यक्रम में हैं। इन कोर्स में एडमिशन पाने के लिए स्नातक में 55 फीसद अंक और दो साल तक अनुभव की आहर्ता रखी गई है और फीस आठ लाख रुपये है। ये कोर्स आनलाइन है और इस दौरान 15 दिन संस्थान में भी क्लास ले सकेंगे। ये चारों ई-मास्टर्स कोर्स साइबर सुरक्षा, डेरिवेटिव बाजार और जोखिम प्रबंधन समेत विद्युत क्षेत्र, अर्थशास्त्र और प्रबंधन से संबंधित हैं। जल्द ही इसमें और प्रोग्राम भी जोड़े जाएंगे।

Edited By: Abhishek Agnihotri