कानपुर, जेएनएन। कोरोना वायरस के बदलते रूप और तीसरी लहर के आने की आशंका को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में तीसरी लहर से पहले ही कोरोना पर वार के लिए आइआइटी कानपुर की मदद ली जा रही है। यहां के विशेषज्ञ दोनों राज्यों के लिए ऐसी प्लाङ्क्षनग कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ कोविड की चाल पकड़ में आ जाएगी, बल्कि उसके खात्मे के लिए तुरंत एक्शन प्लान बनाया जा सकेगा। जल्द ही संस्थान का दोनों प्रदेशों के साथ करार होने वाला है। आइआइटी के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर प्रदेश सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को प्रस्ताव बनाकर भेज चुके हैं। दिल्ली के साथ कागजी काम पूरे किए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि आइआइटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के प्रो. मणींद्र अग्रवाल और उनकी टीम ने गणितीय माडल के सहयोग से देश, कई राज्यों और वहां के शहरों में कोरोना के केस बढऩे-घटने का सटीक आकलन किया था। यह आकलन मार्च, अप्रैल, मई और जून के लिए हुआ। इस माडल की खूबियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही जिलों में आक्सीजन आडिट करने की जिम्मेदारी आइआइटी को दे चुकी है।

शहरों में संक्रमण फैलने की पहले ही मिल जाएगी रिपोर्ट : प्रो. मणींद्र अग्रवाल के मुताबिक, माडल की सहायता से उप्र और दिल्ली के शहरों में संक्रमण फैलने की रिपोर्ट पहले ही दे दी जाएगी। यह किस तेजी से बढ़ेगा या उसमें कमी आएगी, इसकी रिपोर्ट तैयार होगी। तीसरी लहर को रोकने के लिए सरकार रणनीति बना सकेगी। यह प्लान बहुत ही विस्तारित ढंग से तैयार किया जा रहा है। इसमें संक्रमण की चाल को बहुत ही छोटे स्तर से देखा जाएगा।

सही समय पर कर सकेंगे लाकडाउन : आइआइटी की रिपोर्ट और आकलन के आधार पर सही समय पर लाकडाउन लगाया जा सकेगा। सरकार साप्ताहिक बंदी और नाइट कफ्र्यू का निर्णय ले सकेगी।

  • उत्तर प्रदेश और दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत चल रही है। जल्द ही संस्थान के साथ करार किया जाएगा। आइआइटी कोरोना संक्रमण को लेकर पूरा प्लान तैयार कर रहा है। प्रो. मणींद्र अग्रवाल के नेतृत्व में काम किया जाएगा। -प्रो. अभय करंदीकर, निदेशक आइआइटी कानपुर।

Edited By: Abhishek Agnihotri