कानपुर, जेएनएन। शहर में धूल-धुआं, औद्योगिक अपशिष्ट और लगातार वाहनों का बढ़ रहा दबाव प्रदूषण की बड़ी वजह के तौर पर सामने आए हैं। इनसे लोगों का दम घुट रहा है। अब इस पर शिकंजा कसा जा सकेगा, क्योंकि आइआइटी ने इसके कारण और कारकों का अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार की है। इसके लिए दो गुणा दो किलोमीटर के 174 ग्रिड स्थानों को चिह्नित करके जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) देखा गया तो सच सामने आया।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के सदस्य सचिव आशीष तिवारी ने शनिवार को जिला पर्यावरण समिति समेत अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ ऑनलाइन कांफ्रेंसिंग करके इस रिपोर्ट पर चर्चा की। शहर में किस क्षेत्र में किस चीज से प्रदूषण फैल रहा है इसका आंकलन करने के लिए यूपीपीसीबी ने आइआइटी की मदद ली थी। आइआइटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर मुकेश शर्मा ने अलग-अलग मोहल्लों व चौराहों की दो गुणा दो किलोमीटर की ग्रिड बनाकर वहां के नमूने लेकर परीक्षण करके रिपोर्ट तैयार की। प्रो. शर्मा ने बताया कि अगर कारण और कारकों पर ध्यान दिया जाए तो शहर का प्रदूषण काफी हद तक कम किया जा सकता है।

15 अप्रैल तक विभाग देंगे रिपोर्ट, बनेगा एक्शन प्लान

अब केडीए, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पनकी थर्मल पावर हाउस, यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन व वन विभाग उन कारकों को समाप्त करने के लिए उस मास्टर प्लान पर काम करेंगे, जिसे आइआइटी ने तैयार किया है। यह सभी विभाग 15 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट देंगे। उसके बाद इन सभी ग्रिड में प्रदूषण की फिर जांच की जाएगी। उसकी रिपोर्ट के आधार पर प्लान को जस का तस रखा जा सकता है या उसमें जरूरी बदलाव होंगे। बैठक में डीएम आलोक तिवारी, केडीए वीसी राकेश सिंह, नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी, प्रभागीय वन अधिकारी अरविंद यादव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. अनिल कुमार माथुर, मेट्रो व पनकी थर्मल पावर हाउस समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

कहां-क्या अधिक मिला

धूल : कल्याणपुर, गोल चौराहा और पनकी।

धुआं : दादानगर, जरीब चौकी व पनकी औद्योगिक क्षेत्र

औद्योगिक अपशिष्ट : पनकी, दादानगर और जाजमऊ।