कृषि अवशेषों से पैकेजिंग बाक्स बना रही आइआइटी की कंपनी

- थर्माकोल के विकल्प के रूप में शुरू किया उत्पादन, आइआइटी ने दिया बजट

जासं, कानपुर : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) की इन्क्यूबेटेड कंपनी किनोको बायोटेक ने फसल अवशेषों से जैव पैकेजिंग बाक्स बनाने की तकनीक विकसित की है। ये उत्पाद थर्माकोल के विकल्प के रूप में उतनी ही लागत में ग्राहकों को मिल सकेंगे। बाक्स के औद्योगिक निर्माण के लिए आइआइटी ने कंपनी को बजट भी दिया है।

किनोको बायोटेक कंपनी गीतानगर निवासी कंप्यूटर साइंस के छात्र चैतन्य दुबे ने शुरू की है। उन्होंने बेंगलुरु के एक इंजीनियरिंग कालेज से बीटेक डिग्री ली थी। इसके बाद भौंती में कुछ समय तक मशरूम का उत्पादन भी किया। पिछले वर्ष उन्होंने फसलों के अवशेष का सदुपयोग करने के लिए कार्ययोजना तैयार की और थर्माकोल के विकल्प के रूप में फसल अवशेषों से बने बाक्स बनाने की तकनीक बनाई। उन्होंने अपने इस स्टार्टअप को आइआइटी के स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआइआइसी) में प्रस्तुत किया था। आइआइटी ने बजट भी उपलब्ध कराया है। चैतन्य ने बताया कि बड़े पैमाने पर किसान फसल अवशेषों को जला देते हैं, जबकि इसका अन्य कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उनकी कंपनी किसानों से फसल अवशेष लेकर उसमें फंगस की जड़ें मिलाकर जैव पैकेजिंग बाक्स बना रही है। ये बाक्स थर्माकोल की ही तरह मजबूत व टिकाऊ हैं और थर्माकोल की कीमत में ही उपलब्ध होंगे। इनमें विभिन्न इलेक्ट्रानिक उत्पाद, खाद्य पदार्थ पैक करके विभिन्न स्थानों पर भेजे जा सकते हैं। जैव संवर्धित होने के कारण यह बाक्स पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

Edited By: Jagran