कानपुर, जेएनएन। लखनऊ में लक्ष्य से 36 दिन पहले अपना कार्य खत्म करने वाली उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन के कानपुर में लेट होने की आशंका है। कोरोना के चलते अपने कार्य में काफी पीछे चल रही है मेट्रो ने अब आइआइटी से मोतीझील के बीच प्राथमिक कारीरोड में 30 नवंबर 2020 की जगह जनवरी 2022 में यात्रियों के लिए मेट्रो चलाने की योजना बनाई है।

इसके चलते मेट्रो के आगे के कार्य भी लेट होने की आशंका है। खुद मेट्रो प्रबंध निदेशक कुमार केशव के मुताबिक मेट्रो जितने दिन लेट होगी, उसे प्रतिदिन के हिसाब से 80 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा। इसके चलते मेट्रो अपने बाकी बचे कार्य को ज्यादा से ज्यादा तेजी से करके इन दिनों को कम करने के प्रयास में है क्योंकि ऐसा ना हुआ तो उसे प्रोजेक्ट के अतिरिक्त खर्च को पूरा करने के लिए किसी वित्तीय एजेंसी से कर्ज भी लेना पड़ सकता है।

मेट्रो ने जब कानपुर में अपना कार्य शुरू किया था तो उसका लक्ष्य 31 जुलाई 2021 तक मेट्रो के ट्रायल रन का था और 30 नवंबर 2021 को यात्रियों के लिए मेट्रो चलाने का था। कोरोना के चलते मेट्रो के कार्य को तगड़ा झटका लगा। अप्रैल के अंत में मेट्रो को शहर में सबसे पहले काम दोबारा शुरू करने का मौका मिला लेकिन मई की शुरुआत में जैसे ही लोगों का आना जाना शुरू हुआ अधिकारियों के रोकने के बाद भी मेट्रो में कार्य करने वाले कामगार अपने घरों को लौट गए। जहां एक हजार से अधिक कामगार उस समय काम कर रहे थे, उनकी संख्या तीन सौ के करीब बची। कामगारों की कम संख्या की वजह से मेट्रो का काम कई माह पीछे हो गया।

मेट्रो एमडी कुमार केशव के मुताबिक मेट्रो का कार्य जितने दिन आगे बढ़ेगा, उसके हिसाब से रोज करीब 80 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च प्रोजेक्ट पर पड़ेगा। इसलिए अब मेट्रो इस प्रयास में है कि 30 नवंबर 2021 के ज्यादा से ज्यादा करीब उसका कार्य खत्म हो जाए। ऐसा ना हुआ तो उसे अतिरिक्त खर्च के लिए अलग से कर्ज लेना होगा। लखनऊ में मेट्रो में रोज का करीब 50 लाख रुपये खर्च था। मेट्रो ने 36 दिन पहले इस कार्य को खत्म कर मेट्रो संचालन से पहले ही 18 करोड़ रुपये बचा लिए थे।

अब कानपुर में अतिरिक्त होने जा रहे खर्च को बचाने की तैयारी है। कानपुर के पूरे मेट्रो प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 11,076.48 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन ने यूरोपियन बैंक से अगस्त 2020 में 5,551.99 करोड़ रुपये का वित्तीय अनुबंध किया था। फिलहाल प्राथमिक कारीडोर करीब दो माह लेट होने की स्थिति में है। इसके चलते आगे का कार्य भी लेट हो सकता है। फिलहाल करीब 48 करोड़ रुपये का मेट्रो पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ सकता है।

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