कानपुर, जेएनएन। शहर के चर्चित दिव्याकांड मामले में बुधवार को हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मुनेश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की बेंच ने अपना निर्णय सुना दिया। डिवीजन बेंच ने स्कूल प्रबंधक के छोटे बेटे पीयूष को दोषी पाते हुए जिला न्यायालय से मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, जबकि बड़े बेटे मुकेश और स्कूल के प्रधानाचार्य संतोष सिंह उर्फ मिश्राजी को बरी कर दिया। हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एलएम सिंह और अधिवक्ता रघुवीर शरण सिंह ने बताया कि पीयूष की सजा का आधार डीएनए रिपोर्ट बनी।

यह था मामला

रावतपुर गांव निवासी सोनू भदौरिया की बेटी अनुष्का उर्फ दिव्या भारती ज्ञानस्थली स्कूल में कक्षा छह की छात्रा था। 27 सितंबर 2010 को वह सुबह स्कूल गई जहां उसकी हालत बिगड़ गई। हालत बिगडऩे पर स्कूल प्रबंधन ने आया के माध्यम से उसे दोपहर करीब एक बजे घर भेज दिया। स्वजन उसे कुलवंती अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अधिक रक्तस्राव के चलते उसकी मौत हुई थी।

दुष्कर्म व हत्या का दर्ज हुआ था मुकदमा

दिव्या की मां सोनू भदौरिया ने कल्याणपुर थाने में तहरीर दी थी कि वह रोज की तरह सुबह 7:30 बजे बेटी को स्वस्थ हालत में स्कूल छोड़कर आई थी। दोपहर एक बजे आया उसे घर छोडऩे आई तो बेटी स्कूल ड्रेस में नहीं थी। मां ने दुष्कर्म की आशंका जताई जिस पर पुलिस ने दुष्कर्म और हत्या के मामले में रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने इस मामले में स्कूल प्रबंधक चंद्रपाल वर्मा उनके बेटे मुकेश व पीयूष के साथ स्कूल के प्रधानाचार्य संतोष सिंह उर्फ मिश्राजी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

16 लोगों का हुआ था डीएनए टेस्ट

छात्रा की मौत के बाद मामला सीबीसीआइडी को सौंपा गया था। उस दौरान मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय में स्कूल प्रबंधक, उनके बेटे और शिक्षक समेत 16 लोगों का डीएनए टेस्ट हुआ था। जिसमें चंद्रपाल वर्मा, सुधीर और पीयूष का डीएनए मैच किया गया था। चंद्रपाल वर्मा की उम्र 72 साल थी जबकि मुकेश घटना के समय उन्नाव में था, जबकि पीयूष की उपस्थिति स्कूल परिसर के दो किमी दायरे में पायी गई थी।

विशेष न्यायालय ने सुनाई थी सजा

वरिष्ठ अधिवक्ता अजय भदौरिया ने बताया कि पांच दिसंबर 2018 को तत्कालीन विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट ज्योति कुमार त्रिपाठी ने पीयूष को हत्या में उम्रकैद की सजा व 50 हजार जुर्माना जबकि कुकर्म में दस साल कैद 25 हजार जुर्माना से दंडित किया था। न्यायालय ने मुकेश और प्रधानाचार्य संतोष को लापरवाही का दोषी पाते हुए एक-एक वर्ष कैद और 21-21 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। जबकि चंद्रपाल वर्मा को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था।

इंसाफ होगा, भरोसा था

दिव्या की मां सोनू भदौरिया ने कहा कि इंसाफ होगा, इसका पूरा भरोसा था। जिला न्यायालय से भी उन्हें इंसाफ मिला। अन्य दोनों लोगों को भी सख्त सजा होनी चाहिए थी क्योंकि उनकी लापरवाही से ही बेटी की जान गई। वक्त रहते वह अपनी जिम्मेदारी निभाते तो दिव्या की जान बच जाती।

Edited By: Abhishek Agnihotri