कानपुर [शशांक शेखर भारद्वाज]। गंगा और उसकी सहायक नदियों में मेटल्स व प्रदूषण के अन्य कारकों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) क्षेत्रीय कार्यालय की प्रयोगशाला को उच्चीकृत किया जाएगा। दरअसल अभी बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), घुलित ऑक्सीजन (डीओ), रंगों और पानी की गुणवत्ता की जांच आसानी से हो जाती है। अगर उसमें हानिकारक मेटल्स और अन्य कारकों की पड़ताल करनी हो तो पानी का नमूना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दिल्ली और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के लखनऊ स्थित मुख्यालय भेजना पड़ता है। वहां से रिपोर्ट आने में समय लगता है। कई बार दूषित पानी की स्थिति सुधर जाती है, उसके बाद ही रिपोर्ट जारी होती है। 
औद्योगिक इकाइयों के उत्प्रवाह की होगी जांच
जाजमऊ, पनकी और रूमा क्षेत्रों में कई औद्योगिक इकाइयां हैं। वहां से नालों के माध्यम से दूषित उत्प्रवाह गंगा में प्रवाहित होता है। उन उत्प्रवाहों में हैवी मेटल्स और कई खतरनाक एसिड रहते हैं, जिनसे जलीय जंतुओं को नुकसान हो सकता है। हैवी मेटल्स में क्रोमियम, आर्सेनिक, जिंक, लेड आदि शामिल हैं।
कानपुर की लैब से कई जनपदों को लाभ
फर्रुखाबाद में रामगंगा व गर्रा नदी और कन्नौज में काली नदी आकर गंगा में मिलती है। तीनों नदियों की धारा गंगा में समाहित होकर कानपुर से फतेहपुर होते हुए प्रयागराज तक पहुंचती है वहीं पांडु नदी फतेहपुर जिले की सीमा में गंगा से मिलती है। लैब में नई तरह की जांच की सुविधा से कई जनपदों को लाभ मिल सकेगा।
यूपीपीसीबी को भेजा प्रस्ताव
क्षेत्रीय कार्यालय से यूपीपीसीबी मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से जल्द ही स्वीकृति मिल सकती है।
क्या बोले जिम्मेदार
गंगा और उसकी सहायक नदियों में मेटल्स और एसिड की जांच की सुविधा से प्रदूषण और विस्तृत रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद सुधार के उपाय भी किए जा सकेंगे।
-कुलदीप मिश्र, मुख्य पर्यावरण अधिकारी, यूपीपीसीबी 

Posted By: Abhishek

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