कानपुर, जेएनएन। जिले में मानकों को ताख पर रख निजी अस्पतालों में ट्रामा सेंटर चल रहे हैं। जहां हादसे में घायलों एवं गंभीर रूप से बीमार मरीजों से इमरजेंसी इलाज के नाम पर जमकर लूट होती है, जबकि वहां पर न सुविधाएं होती हैं और न ही संसाधन और डाक्टर। यही हाल पूरे प्रदेश का है। इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की थी। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। बिना मानक चले रहे ट्रामा सेंटरों के खिलाफ दैनिक जागरण ने अभियान चलाकर जिम्मेदारों को आईना दिखाया। हालांकि उसके प्रमाण सामने लाने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई से हिचक रहे हैं।

बिना निरीक्षण ट्रामा सेंटर का पंजीकरण

शहर के विभिन्न क्षेत्रों के 45 ट्रामा सेंटरों की जागरण टीम ने पड़ताल की थी। इस दौरान कई ऐसे ट्रामा सेंटर मिले, जो दो कमरों में चल रहे थे। इन सेंटरों का बिना निरीक्षण किए ही अफसरों ने पंजीकरण कर दिया। कई ऐसे ट्रामा सेंटर मिले, जहां पर सुविधाएं, एंबुलेंस और डाक्टर नहीं मिले। ट्रामा सेंटरों पर विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञ डाक्टरों की 24 घंटे उपलब्ध होने चाहिए, लेकिन वहां एमबीबीएस डाक्टर भी नहीं थे। अप्रशिक्षित कर्मचारियों के हवाले ट्रामा सेंटर थे। इन सेंटरों की फोटो समेत खबरें भी प्रकाशित की गईं। जिम्मेदार अधिकारियों को प्रमाण भी दिए गए। उसके बाद भी अफसरों की चुप्पी उनकी भूमिका पर ही सवाल उठा रही है। वहीं, सीएमओ डा. नैपाल ङ्क्षसह का कहना है कि शहर के बाहर हूं। इसलिए कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आते ही जांच कराकर इन सेंटरों पर सख्त कार्रवाई करूंगा।

बिना पार्किंग खड़े हो गए ट्रामा सेंटर

केडीए दस्ते की अनदेखी के चलते शहर में बिना पार्किंग के ही ट्रामा सेंटर खड़े हो गए हैं। कई जगह एक-एक कमरे में ट्रामा सेंटर चल रहे हैं। कागज में पार्किंग है, लेकिन उसे स्टोर रूम के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। शहर की सीमा से जुड़े इलाके बर्रा, कल्याणपुर, जाजमऊ, रामादेवी में ट्रामा सेंटर के नाम पर मजाक हो रहा है। बेहतर इलाज के नाम पर मरीजों को ठगा जा रहा है। घरों में ट्रामा सेंटर के बोर्ड लगा दिए गए हैं, लेकिन अंदर इलाज के नाम पर सुविधाएं ही नहीं हैं। दुघर्टना में घायल लोगों को तुरंत इलाज मिल सके, इसलिए ट्रामा सेंटर खोले जाते हैं। इसी की आड़ में मकान में ट्रामा सेंटर का बोर्ड लगा दिया जाता है। कोई घायल आता है तो प्राथमिक इलाज करके दूसरे अस्पतालों में कमीशन के आधार पर शिफ्ट कर दिया जाता है। ये खेल सबसे ज्यादा शहर सीमा से जुड़े इलाकों में हो रहा है।

शिवली रोड पर तमाम ट्रामा सेंटर के बोर्ड लगे हैं, जो एक-एक कमरे में चल रहे हैं। पार्किंग के लिए जगह है, लेकिन वहां पर सामान रखा है या दूसरे कामों के लिए प्रयोग हो रही है। नर्सिंगहोम के लिए कम से कम तीन सौ वर्ग मीटर भूखंड होना चाहिए और 12 मीटर चौड़ी सड़क होनी चाहिए। कई तो गलियों और सौ-सौ वर्ग मीटर जगह में नर्सिंग होम खड़े करके उनमें ट्रामा सेंटर बना दिए गए हैं। अब केडीए शहर में मानक के विपरीत बने निर्माणों को चिह्नित कर रहा है। केडीए सचिव एसपी ङ्क्षसह ने बताया कि मानक के विपरीत बने निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Abhishek Agnihotri