कानपुर, जेएनएन। हाॅलमार्क का पंजीयन लेने की अनिवार्यता किस पर हो, इस पर जेवर निर्माता और जेवर बेचने वालों के बीच लकीर खिंच रही है। दोनों ही चाह रहे हैं कि हॉलमार्क का पंजीयन लेने की जो भी अनिवार्यता होने जा रही है, वह दूसरे के ऊपर लगे ताकि कोई गड़बड़ी होने पर वे किसी भी कार्रवाई के दायरे से बाहर रहें।

हाॅलमार्क का लाइसेंस अभी शहर में बहुत कम दुकानदारों के पास है। हाॅलमार्क की अनिवार्यता को लेकर जब से राष्ट्रीय सलाहकार समिति की वेबिनार पर चर्चा शुरू हुई है, उसमें जेवर निर्माता और जेवर विक्रेता के दो अलग-अलग धड़े बन रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक जेवर निर्माता चाहते हैं कि हॉलमार्क का लाइसेंस और यूनीक आइडेंटीफिकेशन (यूआइडी) नंबर की जिम्मेदारी उस कारोबारी पर डाली जाए जो अंतिम ग्राहक को माल बेचे। उनके तर्क हैं कि ग्राहक सीधे दुकानदार को ही जानता है, इसलिए वह उसके पास ही शिकायत करेगा। 

दूसरी आेर ग्राहकों को माल बेचने वाले कारोबारियों का कहना है कि जिस तरह ट्यूब, नल, प्रेशर कुकर, हेलमेट सभी का निर्माण करने वाले निर्माता पर ही बीआइएस का लाइसेंस लेने की जिम्मेदारी होती है, दुकान पर माल बेचने वाले को लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होती। ठीक इसी तरह हॉलमार्क की भी व्यवस्था हो। जो लोग सराफा कारोबार में जेवर बना रहे हैं, उन पर हॉलमार्क अनिवार्य किया जाए न कि दुकानदारों पर। जब निर्माता के स्तर पर ही हॉलमार्क अनिवार्य हो जाएगा तो वहां से बनकर निकला प्रत्येक जेवर हॉलमार्क होगा। दुकानदारों का यह भी कहना है कि जेवर के साथ कोई भी ऐसी लटकन या अन्य फैंसी चीज लगनी हो तो उसका भी अलग से हॉलमार्क किया जाना चाहिए ताकि बिक्री के समय उसका भी अलग से उल्लेख हो सके।

Edited By: Shaswat Gupta