कानपुर, जेएनएन। जीएसटी ने अब भविष्य में विलंब शुल्क को टर्नओवर के हिसाब से तय किया है। मई 2021 और इससे आगे के कारोबार के रिटर्न यदि देर से जमा किए गए तो इसी फार्मूले के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। करदेयता होने पर न्यूनतम दो हजार व अधिकतम 10 हजार रुपये प्रति रिटर्न शुल्क लगेगा।

जीएसटी में एक जुलाई 2017 से अप्रैल 2021 तक के देर से फाइल किए गए रिटर्न के लिए व्यवस्था की गई है कि करदेयता न होने पर प्रति रिटर्न 500 रुपये व करदेयता होने पर प्रति रिटर्न एक हजार रुपये का विलंब शुल्क लगेगा, लेकिन इसके भी आगे बढ़ते हुए मई 2021 से आगे के लिए भी व्यवस्था दी गई है। इसमें टर्नओवर के हिसाब से विलंब शुल्क लगेगा।

इसमें जिस रिटर्न में कोई करदेयता नहीं होगी तो उसमें पांच सौ रुपये विलंब शुल्क देना होगा लेकिन जिन रिटर्न में करदेयता होगी, उसमें विलंब से रिटर्न फाइल करते समय टर्नओवर भी देखा जाएगा। यदि टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये तक है तो अधिकतम विलंब शुल्क दो हजार रुपये देने होंगे। यदि टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये से पांच करोड़ रुपये के बीच है तो विलंब शुल्क पांच हजार रुपये देने होंगे। इसके बाद यदि टर्नओवर पांच करोड़ रुपये से अधिक है तो विलंब शुल्क 10 हजार रुपये तक होगा। जीएसटी में जिन कारोबारियों ने समाधान योजना को अपनाया होगा, उन्हेंं रिटर्न फाइल करने में विलंब होने पर दो हजार रुपये अधिकतम शुल्क लगाया जाएगा। 

Edited By: Akash Dwivedi