जागरण संवाददाता, कानपुर : गंगा में जलस्तर कम होने के साथ ही प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ी है। कालापन बढ़ने के साथ ही उसे ट्रीट करने में जलकल को डेढ़ गुना केमिकल खर्च करना पड़ रहा है। भैरोघाट से गंगा का पानी खींचने के लिए जलकल को अभी से चारों ड्रेजिंग मशीन लगानी पड़ रही हैं।

जाड़े में ही गंगा का जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे गंगा में गंदगी बढ़ने लगी है। 15 दिन पहले कालापन दस से 15 हैजेन था जो जलस्तर कम होने और दूषित पानी आने से 30 हैजेन तक पहुंच गया है। साथ ही नाइट्राइट की मात्रा मिली है यानी कहीं से गंगा में दूषित पानी आ रहा है। स्थिति ये है कि गंगा का जलस्तर 359.4 फीट पहुंच गया है, जबकि यह फरवरी के अंत में होता है। गंगा से जलकल रोज बीस करोड़ लीटर कच्चा पानी जलापूर्ति के लिए खींचता है। जलस्तर कम होने से बढ़ी बालू की मात्रा हटाने को चारों ड्रेजिंग मशीन लगा दी गई हैं। अगर जलस्तर और तीन फीट कम हो जाएगा तो जलकल विभाग को कच्चा पानी खींचने के लिए कच्चा बंधा जनवरी में ही बनाना पड़ेगा। सिंचाई विभाग ने बैराज के 30 में आठ गेट खोलकर 8360 क्यूसिक पानी छोड़ा। तेजी से पानी आने के कारण आसपास की गंदगी बहकर रानीघाट, भैरोघाट व मैगजीन घाट की तरफ आ गई। रोक के बाद भी दूषित पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है। जनवरी में माघ मेला शुरू होने वाला है, इसको लेकर शासन स्तर पर सिर्फ कागजी कार्रवाई की जा रही है। यही वजह है कि गंगा निर्मल होने की जगह और गंदी हो गई है। बिना नाले रोके गंदा पानी रोक पाना मुश्किल है। जलकल महाप्रबंधक आरपी सिंह सलूजा ने बताया कि गंगा में कालापन बढ़ने से पानी ट्रीट करने में खर्च बढ़ा है। गंगा में पानी छोड़ने के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिखा है।

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