आलोक शर्मा, कानपुर : अच्छी परवरिश, परिवार का प्यार और बेहतर शिक्षा पाकर बिटिया होनहार बन रही थी लेकिन दो मां-बाप होना उसके लिए नासूर बन गया। वो जहां रहना चाहती है वहां रह नहीं सकती और जिस मां ने उसे पाने के लिए दावा किया, उसके साथ जाना नहीं चाहती। अपने, पराए और कानूनी पेचों में फंसी उस बेटी की जिंदगी अब दोराहे पर आ खड़ी हुई है। मामला शहर से जुड़ा है पर परेशान होने वाली बेटी मुबंई की है।

कल्याणपुर के राजकीय उन्नयन बस्ती निवासी महिला ने 2006 में अपनी दो वर्षीय बेटी मुंबई के मुस्लिम परिवार को गोद दी थी। आपसी समन्वय और विश्वास के इस समझौते में कानून के नियमों का पालन नहीं हुआ। मुस्लिम परिवार ने बेटी को अच्छा माहौल और बेहतर परवरिश दी। कान्वेंट स्कूल में दाखिला कराया। सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन पहले महिला बेटी को वापस लाने के लिए उसके घर व स्कूल जाने लगी। परेशान होकर बेटी ने शिक्षिका को पूरी बात बताई, जिसके बाद उन्होंने चाइल्ड लाइन में शिकायत की। इसी घटना के बाद महिला ने भी मुंबई के सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) में शिकायत कर दी। सीडब्ल्यूसी ने कानपुर के चाइल्ड लाइन से महिला के रहन सहन और सामाजिक स्तर के साथ अन्य बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट मांगी है। चाइल्ड लाइन के समन्वयक विनय कुमार ओझा को जांच सौंपी गई है।

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दो माह से अनाथालय में रह रही बिटिया

बेटी पर जन्म देने वाली मां के दावे के बाद सीडब्ल्यूसी ने उसे मुंबई की एक संस्था (अनाथालय) में रहने के आदेश दिए हैं। दो माह से बेटी वहां रह रही हैं।

महिला का दावा, प्रतिमाह देते पांच हजार रुपये

महिला का दावा है कि उसने मुस्लिम परिवार को बेटी देखभाल करने के लिए दी थी। इसके एवज में प्रतिमाह पांच हजार रुपये भी दे रही है।

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इस मामले की जांच कर रिपोर्ट मुंबई सीडब्ल्यूसी को भेज दी गई है। गोद लेने में कानूनी नियमों की अनदेखी से अक्सर ऐसी समस्याएं पैदा होती हैं।

कमलकांत तिवारी, निदेशक चाइल्ड लाइन

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आपसी समझौते से गोद लेना पड़ सकता भारी

-किशोर न्याय अधिनियम की धारा 80 के तहत नियमों के विपरीत बच्चा गोद लेने या देने पर तीन वर्ष तक की कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है

-कानूनी प्रावधान पूरे न होने पर वास्तविक अभिभावक कभी भी बच्चे पर दावा ठोक सकते हैं

-कई बार ऐसे मामलों में ब्लैक मेल के मामले भी सामने आए

-ऐसे गोद देने पर बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रहता

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ये है गोद लेने की प्रक्रिया

-जिले की अधिकारिक दत्तक ग्रहण इकाई के जरिये ऑनलाइन आवेदन करें

-होम स्टडी रिपोर्ट के लिए सरकार द्वारा तय छह हजार रुपये फीस जमा करनी होगी

-गोद लेने वाले अभिभावक के दस्तावेज, सामाजिक स्तर और आर्थिक स्थितियों की जांच पड़ताल होगी

-नंबर आने व दत्तक ग्रहण इकाई के संतुष्ट होने बच्चा प्री एडॉप्सन में दिया जाएगा

-इस दौरान इकाई जनपद न्यायाधीश के यहां मामला दाखिल करेगी। न्यायालय के आदेश से प्रक्रिया पूरी हो जाएगी

-इस प्रक्रिया से बच्चा गोद लेने पर वास्तविक मां-बाप भी आ जाएं तो बच्चा वापस नहीं करना होगा

Posted By: Jagran

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