जागरण संवाददाता, कानपुर : गंगा की बात क्या करूं..गंगा उदास है, वह जूझ रही खुद से और बदहवास है।। चर्चित गीत की ये दो लाइनें गंगा का दर्द बताने के लिए काफी हैं। बिन पानी रेगिस्तान में तब्दील हो रही गंगा खुद प्यास से तड़प रही हैं। ऐसे में शहर की जलापूर्ति खतरे में है। गुरुवार को जलस्तर 3 इंच और गिरने के साथ 356 फीट तक पहुंच गया। शुक्लागंज की ओर मुड़ी जलधारा वापस लाने और जलापूर्ति के लिए पानी लेने को बंधा बनाने काम और तेज कर दिया गया। शाम तक बालू की बोरियों से पांच मीटर की दीवार खड़ी कर दी गई। साथ ही सभी ड्रेजिंग मशीनें लगाकर कच्चा पानी भैरोघाट पंपिंग स्टेशन की तरफ खींचा जा रहा है।

गर्मी बढ़ने के साथ ही गंगा का जलस्तर घटने लगा है। उस पर बैराज से पानी भी कम छोड़ा जा रहा है, इसकी वजह से बालू के ढेर लग गए हैं और जलधारा शुक्लागंज की तरफ मुड़ रही है। बुधवार को जलस्तर 356.3 फीट था। गुरुवार को 356 फीट पहुंच गया। 48 घंटे में जलस्तर पांच इंच गिर चुका है। गुरुवार सुबह ही जलस्तर तीन इंच घटने पर जलकल अवर अभियंता रमेश चंद्रा टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। बंधा बनाने के लिए मजदूरों की संख्या बढ़वाई। दो दर्जन से ज्यादा मजदूर बालू की बोरियों से बंधा बनाने में जुटे हैं। दोपहर तक पांच मीटर बंधा बना दिया गया था। इससे जलधारा भैरोघाट पंपिंग स्टेशन की तरफ मुड़ने लगी है लेकिन इससे भी जलापूर्ति पर मंडरा रहा खतरा टला नहीं है।

बैराज से भी मिले जलकल को पानी

गंगा बैराज से जलकल को पानी दिया जाए ताकि जलापूर्ति में दिक्कत न हो। पिछले वर्ष तक सात करोड़ लीटर पानी दिया जाता था लेकिन बीच में मुख्य पाइप लाइन में लीकेज हो जाने जलापूर्ति रोक दी गई थी। उसके बाद से जलापूर्ति की ही नहीं गई।

कहते हैं जिम्मेदार

जलापूर्ति को देखते हुए सभी ड्रेजिंग मशीनों से पानी खींचा जा रहा है, साथ ही बंधा भी बनाया जा रहा है। पानी संकट से जिलाधिकारी को भी अवगत कराएंगे ताकि गंगा में और पानी छोड़ा जाए। - आरपी सिंह सलूजा, महाप्रबंधक, जलकल

नरौरा से कम पानी मिल रहा है। बैराज पर जलस्तर भी नियंत्रित करना है। इसके बाद भी पानी छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़ने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। - जयप्रकाश, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग

By Jagran