कानपुर, जेएनएन। भीतरगांव ब्लॉक में बुखार अपने पैर पसारता जा रहा है। करीब 12 से ज्यादा गावों में फैले संक्रमण ने रविवार को आठ लोगों की जान ले ली वहीं एक पतारा ब्लाक में एक बुजुर्ग ने भी दम तोड़ दिया। गावों में अभी तक कोई भी स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंची है। ग्रामीण केवल स्थानीय डॉक्टरों के भरोसे अपना इलाज कराने के लिए बेबस है।
पिछले माह भर से भीतरगांव ब्लॉक के साढ़ थानाक्षेत्र के बरुई अकबरपुर, सचौली, उमरा, गाजीपुर गांव बुखार का संक्रमण फैलने से दो सौ से ज्यादा लोग पीडि़त है। पिछले माह भर से करीब 25 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी है। अब बुखार का संक्रमण अन्य गावों में फैल रहा है। रविवार को बुखार से भीतरगांव कस्बे व बारीगांव में तीन-तीन व देवसढ़ व छतरापुर गांव मे एक-एक लोगों की मौत की होने की पुष्टि हुई है। वहीं पतारा ब्ल़ॉक के पडऱीलालपुर गांव में 68 वर्षीय शेष नरायण मिश्रा की मौत हो गई। बताया की सभी को पांच छह दिनों से बुखार आ रहा था। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज करा कर दवाई ले रहे थे। अचानक बुखार आने से हुई इन मौतों से ग्रामीण दहशत में है। डर के कारण लोग घबराए हुए हैं। दिन प्रतिदिन मौत के आंकड़े बढ़ते चले जा रहे है।
इलाज के अभाव में तड़पकर तोड़ा दम : बुखार साढ़ क्षेत्र में कहर बरसाना सुरु कर दिया है। बीते 24 अप्रैल को दौलतपुर गांव की प्रधान करुणा अवस्थी की बुखार आने से मौत हो गई थी। 24 घंटे बाद ही थाना क्षेत्र के देवसढ़ गांव निवासी चुन्नू की पत्नी 40 वर्षीय ललिता ने बुखार से दम तोड़ दिया। चुन्नू ने बताया कि पत्नी पांच छह दिनों से बुखार से पीडि़त थी। शनिवार देर रात हाल त बिगड़ी तो आनन फानन कानपुर लेकर भागे। बताया कि किसी अस्पताल में दाखिला नहीं मिला। कई अस्पतालों में चक्कर लगाए मगर सभी ने बेड न होने की बात कहकर भगा दिया। चुन्नू ने बताया कि अगर समय से ऑक्सीजन मिल जाती तो पत्नी की जान बच जाती।
जिम्मेदार मौन, ग्रामीण बेबस और असहाय : साढ़ थाना क्षेत्र के कई गावों में बुखार का संक्रमण फैला हुआ है। अब यह भीतरगांव ब्लॉक के कई गावों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। करीब दो सौ से ज्यादा लोग पीडि़त है। पिछले माह भर से रोज -रोज दो से तीन मौतें हो रही है। लोग मर रहे है और स्वास्थ्य विभाग मूक दर्शक बनकर देख रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम गांव नहीं पहुंची है। बुखार से पीडि़त लोग स्थानीय डॉक्टरों के भरोसे अपना इलाज करा रहे है। ग्रामीणों की जांच न होने से यह भी नहीं पता चल पा रहा कि उनको कोरोना है भी की नहीं। ग्रामीमों ने बताया कि गांव में सक्रमण वहुत फैला हुआ है लेकिन जिम्मेदार संज्ञान में नहीं ले रहे। करीब दो सौ से ज्यादा लोग बीमार है, लेकिन गांव के हाल चाल लेने कोई भी अधिकारी नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग की नाकामी सामने आ रही है। ग्रामीणों को कोई भी मदद नहीं हो पा रही है। ऐसे में जिम्मेदार मौन होकर स्टाफ न होने का रोना रो रहे है। वहीं गांव की जनता खुद को बेबस और असहाय महसूस कर रही है।
इनका ये है कहना
- सीएचसी के कई डॉक्टर व कर्मचारी कोरोना से पीडि़त है। जो होम आइसोलेट है। मुक्षे खुद कोरोना है। सीएचसी में कोविड की जांच और वैक्सीनेशन का कार्य जारी है। सीएचसी में दो स्वास्थ्य कर्मी है। ग्राीमीण सीएचसी आकर जांच करा सकते है।
डॉ. अजय मौर्या, चिकित्सा अधीक्षक, सीएचसी भीतरगांव








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