कानपुर, जेएनएन। भाग्य जाग गए...अरे चमत्कार हो गया! नहीं...नहीं, इसे कहते हैं ऊपरवाला जब भी देता तो छप्पर फाड़ के...। सबकुछ चरितार्थ हो गया महावीर नगर विस्तार योजना के भूखंडों की लॉटरी में। एक परिवार के ही पांच सदस्यों की लॉटरी खुल गई। परिवार के सदस्यों के नाम एक के बाद एक सुन उन सभी लोगों के मुंह खुले रहे गए, जो बेसब्री से अपना नाम सुनने के लिए कान खोले थे। लॉकडाउन से पहले हुई इस लॉटरी में चमत्कार की कहानी आज भी बाकी कई आवेदक पचा नहीं पा रहे हैं और भाग्यशाली परिवार की किस्मत से चिढ़ रहे हैं।

महावीर नगर विस्तार योजना में प्लाट के लिए किया था आवेदन

दरअसल, यह मामला है भी ऐसा कि लंबी चर्चा या बहस छिड़ जाए। यहां तक, चमत्कार पर विश्वास न मानने वाले वैज्ञानिक इस पर शोध करने लगें कि यह कैसे हो सकता है? केडीए की महावीर नगर विस्तार योजना के तहत भूखंड आवंटन के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया था। यह आवंटन लॉटरी के जरिए किया जाना था। गड़बड़ी की आशंका से मुक्त, पूरी निष्पक्षता-पारदर्शिताके दावे के साथ केडीए के अफसरों ने आवंटन प्रक्रिया करा दी। लॉटरी सिस्टम से पर्ची निकली तो हर कोई हैरान।

सिकंदरा, कानपुर देहात के जगइयापुर गांव निवासी पति-पत्नी, दोनों बच्चों और चचेरे भाई के नाम पांच भूखंड की लॉटरी लग गई। इनमें हर्षित कटियार को भूखंड बी-156 आवंटित हुआ। इनकी फार्म संख्या 3435 है। सुनीता देवी को भूखंड बी 01 आवंटित हुआ। फार्म की संख्या 3436 है। भगवान स्वरूप को भूखंड संख्या बी 415 आवंटित हुआ। फार्म संख्या 3437 है। अंकिता कटियार को भूखंड संख्या बी 453 आवंटित किया गया। फार्म की संख्या 3438 है। अमित कुमार को भूखंड संख्या बी 320 आवंटित किया गया। फार्म की संख्या 3439 है। सरकारी आवंटन प्रक्रिया में साफ है कि पति व पत्नी में एक ही को प्लाट आवंटित होगा। इस मामले में दोनों को आवंटित किया गया।

इनका ये है कहना

पति व पत्नी में एक ही को भूखंड आवंटित हो सकता है। अगर बच्चे बालिग हैं तो आवंटन हो सकता है। इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। अगर गलत आवंटन हुआ है तो निरस्त किया जाएगा और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

-एसपी ङ्क्षसह, सचिव केडीए 

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