कानपुर, जेएनएन। व्यापार करने के साथ ही व्यापारी राजनीति करने में भी पीछे नहीं रहते। पद पाने के लिए वे हर हथकंडा अपनाते हैं, इसके लिए उन्हें चाहे जो करना पड़े। रियल जर्नलिज्म के तहत नापतौल कॉलम में शहर के व्यापारियों के बीच चल रही खींचतान को सामने लाती राजीव सक्सेना की रिपोर्ट।

बाथरूम की राजनीति में फंसे नेता जी

राजनीति में वे सभी हथकंडे अपनाए जाते हैं, जिनसे ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल हो सकें। कुछ ऐसा ही कपड़ा बाजार से जुड़ी राजनीति में भी हुआ। राजनीति के मैदान में नए-नए आए दुकानदारों ने मतदान से पहले बाजार में एक बाथरूम बनवाया तो उनके सात प्रत्याशी जीत गए। एक झटके में बड़ी सफलता मिलते देख, बाजार की राजनीति करने वाले दूसरे नेता ने अगले चुनाव में ज्यादा वोट हासिल करने के लिए तीन बाथरूम नए करवाने के लिए तुड़वा दिए। 36 के आंकड़े के चलते कमेटी के अध्यक्ष ने लेटरपैड पर महापौर से शिकायत कर दी कि कुछ अराजकतत्वों ने बाजार में बने बाथरूम तोड़ दिए हैं। उन पर कार्रवाई की जाए। अब नई समस्या पैदा हो गई। इस पत्र के बाद जो नेता जी बाथरूम तोड़ कर दोबारा बनवाना चाहते थे, उन्होंने हाथ बीच निर्माण से ही खींच लिए। हां, बाथरूम बाजार की राजनीति में जरूर फंस गए।

नमकीन की लड़ाई

होली आने वाली है। रंग गुलाल के बीच होली के मौके पर नमकीन की खपत कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। यह मौका नमकीन के व्यापारियों के लिए पूरे वर्ष में सबसे ज्यादा बिक्री का होता है, लेकिन ठीक इसी मौके पर नमकीन के कारोबार से जुड़े व्यापार संगठन के अध्यक्ष और महामंत्री एक दूसरे को फूटी आंख देखना पसंद नहीं कर रहे। महामंत्री अध्यक्ष को हटाकर नई कमेटी गठित करना चाह रहे हैं, लेकिन अध्यक्ष हैं कि किसी भी तरह अपनी कुर्सी बचाए रखने की जुगत में लगे हैं। अध्यक्ष ने पिछले दिनों कीमतें बढऩे का बयान जारी किया तो महामंत्री ने उसे पूरी तरह फर्जी करार दे दिया। महामंत्री का आरोप है कि अध्यक्ष उनसे मिलना ही नहीं चाहते। उनका चेहरा देखते ही तेजी से निकल लेते हैं। आखिरकार अब महामंत्री संगठन के अन्य पदाधिकारियों को जोड़ अध्यक्ष को कुर्सी से उतारने की जुगत में लग गए हैं।

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत क्या हुई, कई व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों को खुशी मनाने और फोटो क्लिक कराने का मौका मिल गया। प्रदेश की एक राजनीतिक पार्टी के करीबी व्यापारी मंडल के पदाधिकारी नवीन मार्केट स्थित पार्टी कार्यालय से करीब एक किलोमीटर दूर मालरोड पर जुटे और नारेबाजी के बीच मिठाई बांटने लगे। राहगीर भी हैरान थे कि आखिर यह क्या माजरा है। नारेबाजी करते समय तो पुतले और पोस्टर फूंके जाते हैं लेकिन यहां तो मिठाई बांटी जा रही है। अक्सर सड़क पर प्रदर्शन करने की वजह से चेहरे जाने पहचाने थे। कुछ राहगीर ज्यादा सोच विचार करने की जगह लड्डू लेकर निकल लिये, लेकिन यह कानपुर है, कुछ ने पूछ ही लिया, भइया नारेबाजी और लड्डू वितरण समझ नहीं आया। नेता जी बोले, अरे दिल्ली में आप की सरकार बन गई है। राहगीर भी मुस्करा कर बोले, ऐसा होता है बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना।

कभी इधर तो कभी उधर, अब फिर लौटेंगे पुराने घर

व्यापारिक राजनीति में एक नेता जी अचानक बहुत ज्यादा चर्चित हो गए। पता नहीं क्या बात है कि चाहे चाचा हों या उनके धुर विरोधी, दोनों उन्हें हाथों हाथ ले रहे हैं। मीठी-मीठी गोलियां खिलाने वाले व्यापारी नेता इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं। एक वर्ष पहले चाचा के व्यापार मंडल का चुनाव हुआ तो वह उनके गले लग गए। निर्विरोध संगठन मंत्री भी बने, लेकिन पैर रुकने का नाम नहीं ले रहे थे तो फिर लौट लिए पुराने व्यापार मंडल में। अब बड़ा पद पाकर युवा संगठन के महामंत्री भी बन गए। शहर के व्यापारियों को लगा कि अब थोड़ा रुकेंगे, लेकिन इन्हें आराम कहां। पिछले दिनों ये फिर चाचा के व्यापार मंडल में पहुंच गए। चाचा भांप गए कि इनके पैरों में चक्र है, इसलिए फिलहाल कोई पद नहीं दिया। कहा जा रहा है कि इससे नाराज हो कर अब वे फिर पुराने घर लौटने की फिराक में हैं।  

Posted By: Abhishek

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