कानपुर, जागरण संवाददाता। अमूमन थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद कोशिश यही रहती है कि आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट (आरोप पत्र) दायर हो। लेकिन, एक थाना ऐसा भी है, जहां कोशिश चार्जशीट लगाने की नहीं, बल्कि फाइनल रिपोर्ट (अंतिम रिपोर्ट) लगाने की रहती है।

जी हां, प्रदेश के हर जनपद में ढाई दो साल पहले खुले विद्युत थानों में वही विवेचक सफल माना जाता, जो अधिक से अधिक फाइनल रिपोर्ट लगाता है। असल में इसकी वजह राजस्व वसूली की है। बिजली चोरी के मामलों में चार्जशीट का मतलब है अदालत में लड़ाई, जबकि फाइनल रिपोर्ट का मतलब है कि उपभोक्ता ने अपराध स्वीकार करते हुए सम्मन शुल्क व जुर्माना जमा कर दिया है।

पहले बिजली चोरी के मामले संबंधित थानों में ही दर्ज होते थे। चूंकि पुलिस के पास कानून व्यवस्था को लेकर इतने कार्य होते थे कि वह बिजली चोरी के दर्ज मुकदमों में ध्यान नहीं देते थे। विवेचक अधिकतर मामलों में चार्जशीट लगाकर अपनी विवेचना खत्म कर कागजी खानापूरी करते थे। इसी को देखते हुए सितंबर 2019 को प्रदेश के हर जिले में एक बिजली थाना की स्थापना की गई। बिजली थाना बनने के बाद वह बिजली चोरी के मामलों में चार्जशीट नहीं बल्कि लगभग 80 प्रतिशत मामलों में अंतिम रिपोर्ट लग रही है। इसका असर यह पड़ रहा है कि बिजली चोरों से बिजली विभाग का सरकारी खजाना भर रहा है।

आंकड़ों की नजर- एक आंकड़े के अनुसार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने वर्ष 2021-2022 में बिजली चोरों से कानपुर जोन के 13 जनपदों में 12 करोड़ रुपये की वसूली की थी, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 2.12 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। विद्युत थाना के स्थापना के बाद से अब तक 33.30 करोड़ की राजस्व वसूली हो चुकी है।

कानपुर डिस्काम

वर्ष - कुल मुकदमे - फाइनल रिपोर्ट - आरोप पत्र - राजस्व वसूली

2019 - 2181 - 1307 - 874 - 2.54 करोड़

2020 - 20438 - 7038 - 1416 - 16.58 करोड़

2021 - 23055 - 4963 - 68 - 12.04 करोड़

2022 - 14652 - 549 - 0 - 2.13 करोड़

केस्को

वर्ष - कुल मुकदमे - फाइनल रिपोर्ट - आरोप पत्र - राजस्व वसूली

2019 - 670 - 478 - 192 - 1.10 करोड़

2020 - 2517 - 997 - 91 - 2.67 करोड़

2021 - 1980 - 497 - 0 - 1.24 करोड़

2022 - 981 - 113 - 0 - 31.48 लाख

जिम्मेदार बोले- बिजली चोरी के मुकदमे अन्य मुकदमों से बिल्कुल अलग होते हैं। हमारी प्राथमिकता है कि बिजली चोर अपराध स्वीकार करके जुर्माना जमा करें, जिससे राजस्व हानि को पूरा किया जा सके। आरोपित व्यक्ति मुकदमा दर्ज होने के बाद जब शमन शुल्क और राजस्व जमा कर देता है तो बिजली विभाग एनओसी जारी करता है। उसके आधार पर हम अंतिम रिपोर्ट लगाते हैं। आर्थिक भरपाई के अलावा जुर्माना लगने से उक्त व्यक्ति दोबारा चोरी नहीं करता और अन्य को भी सबक मिलता है। - एसएन साबत, डीजी यूपीपीसीएल

Edited By: Abhishek Agnihotri