स्मार्ट सिटी का ख्वाब संजो रहे शहर में लगातार हो रही सड़कों की खुदाई लोगों का सीना छलनी कर रही है। उड़ते धूल के गुबार से सड़कों पर चलना दूभर हो गया है। शहर में बढ़ते वाहन और लगातार संकरी हो सही सड़कें भी इसका मुख्य कारण है। बेतरतीब खोदाई से लगने वाला जाम और लगातार खड़े हो रहे कंक्रीट के जंगल वायु प्रदूषण और बढ़ा रहे हैं जिससे लोग बीमार हो रहे हैं।

जागरण संवाददाता, कानपुर।

शहर में चौतरफा खोदाई के चलते अब जनता का दम फूलने लगा है। गड्ढों से उड़ती धूल लोगों को परेशान कर रही है। जल निगम के साथ ही केस्को, सीयूजीएल व संचार कंपनी भी शहर में जगह-जगह पाइप व केबिल डालने के लिए सड़कों को छलनी कर रही है। इससे उड़ती धूल प्रदूषण का स्तर बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को बीमारी का शिकार बना रही है।

शहर की मुख्य लाइफ लाइन मालरोड हो, या फिर चुन्नीगंज इलाका सभी जगह आए दिन सड़कों को खोद दिया जाता है। बहाना कभी सीवर लाइन का होता है तो कभी पाइप लाइन डालने के नाम पर समस्या खड़ी कर दी जाती है। कई बार सड़क का निर्माण भी हो चुका है लेकिन हर बार दोबारा सड़क को खोद कर ऊबड़ खाबड़ कर दिया गया। इससे लगातार धूल उड़ती रहती है। अब नरौना चौराहे के पास सड़क खोदी जा रही है। विजय नगर, विष्णुपुरी, तिलक नगर, विकास नगर, स्वरूप नगर, आर्यनगर, बेनाझाबर, संत नगर, पाण्डुनगर में तो समस्या और ज्यादा है। यहां आए दिन जाम के हालात भी बने रहते हैं।

खोदाई में नियम ताक पर रखे

खोदाई से पहले क्या काम होना है इसका बोर्ड लगाया जाना चाहिए। चारों तरफ बेरीकेडिंग हो। खोदाई में निकलने वाली मिंट्टी को हटाया जाए और फैली मिंट्टी पर पानी का छिड़काव हो ताकि धूल न उड़े। खोदाई के बाद सड़क को मोटरेबल कर दिया जाए।

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पेड़ गायब, कंक्रीट के जंगल बन गए

शहर के बढ़ते विस्तार के चलते पेड़ गायब होते जा रहे हैं। इससे लोगों का खुली हवा में सांस लेना दूभर हो गया है। तेजी से हो रहे विस्तार और सड़कों के चौड़ीकरण के चलते सड़कों से पेड़ गायब हो गए है। हालात ये है कि शहर में कुल वन क्षेत्र 66 वर्ग किलोमीटर तक सीमित है। यानि सिर्फ 2.09 फीसद। लगातार वन क्षेत्र कम होने का कारण आवासीय योजनाएं बसना और सड़कों व हाईवे का चौड़ा होना है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

धनाभाव के चलते खोदाई का काम रुक-रुक कर हो रहा है। बकाया धन के लिए शासन को पत्र लिखा है। धन मिलते ही खोदाई के साथ ही सड़कों को मोटरेबल भी कराया जाएगा।

- आरके अग्रवाल, महाप्रबंधक जल निगम

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हाईवे के चौड़ीकरण के चलते पेड़ों की कटाई हो रही है। इसके अलावा शहर में वन क्षेत्र के लिए भूमि की उपलब्धता नहीं है। बाकी शहरी क्षेत्र से जुड़े इलाकों में पौधे लगाए जाते है।

-एसएस श्रीवास्तव, प्रभारी वन निदेशक

By Jagran