कानपुर, जेएनएन। अमूमन लोग खर्राटे आने को गहरी नींद आना मानते हैं। हकीकत यह है कि सांस नली में रुकावट होने पर खर्राटे आते हैं। अगर बैठे-बैठे दिन में झपकी और नींद आने का मतलब भी सांस नली में रुकावट है, इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के कालेज आफ जनरल प्रैक्टिसनर्स (सीजीपी) के कानपुर सब फैकल्टी के 38वें रिफ्रेशर कोर्स के आनलाइन सत्र में स्नोरिंग एवं ओएसएस व्याख्यान में पूणे की विशेषज्ञ डा. सीमाव शेख ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।

उन्होंने बताया कि खर्राटे की बीमारी से अचानक जान जाने का खतरा होता है। सांस नली में रुकावट बढ़ने से ही सांस रुकने पर मरीज गहरी नींद से अचानक उठ जाता है। इसे आब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नीया कहते हैं। इस वजह ही ही मधुमेह, हाई बीपी और लकवे का खतरा बढ़ जाता है। ड्रग इंडुस्ड स्लीप एंडोस्कोपी और डायनमिक एमआरआइ की आधुनिक जाचों से सांस की नली में रुकावट के स्तर का पता लगाकर इलाज किया जाता है।

कोविड में रेडियोलाजी का अहम किरदार : डायग्नोस्टिक इमेजिंग इन कोविड-19 एन ओवर व्यू पर प्रो. नंदिनी बिहारी ने बताया कि कोविड की पहली और दूसरी लहर में रेडियोलाजी का अहम किरदार रहा। कोरोना के निदान, इलाज और रोग के निदान में मददगार साबित हुआ। कई बार आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट निगेटिव रही, लेकिन एचआरसीटी और डिटिजल एक्सरे की मदद से कोरोना की पहचान और जांच की गई, जिसके रिजल्ट बेहतर मिले। इस प्रोग्राम के डायरेक्ट डा. अखिलेश शर्मा एवं डा. साकेत निगम रहे। हेल्थ केयर इन द प्राइवेट सेक्टर चैलेन्जेंस, रेस्पांसबिलिटीज एवं अपारचुनिटीज पर डा. कमल नयन ने व्याख्यान दिया। इसके प्रोग्राम डायरेक्टर डा. अभिषेक कपूर रहे। इस दौरान डा. पल्लवी चौरसिया, डा. आरपीएस भदौरिया और डा. दिनेश सचान मौजूद रहे।

Edited By: Abhishek Agnihotri