कानपुर, जेएनएन। एक जिला, एक उत्पाद को बढ़ाने की बात कितनी भी की जा रही हों और उसमें लोगों को ऋण देने के चाहे जितने दावे हो रहे हों लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। कहने को कानपुर में टेनरी और होजरी को एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है लेकिन कुछ बैंकों को छोड़कर बाकी बैंक आवेदनों को लटकाए रखने में ही ज्यादा विश्वास कर रहे हैं। नौ माह में 44 फीसद लक्ष्य ही पूरा हो सका है। यूनियन बैंक को छोड़ किसी भी बैंक का लक्ष्य तक पूरा नहीं हुआ है। इंडियन ओवरसीज बैंक, इंडियन बैंक, आइडीबीआइ ने एक भी ऋण नहीं दिया है। हालांकि इनके पास समस्या यह भी है कि इन्हें एक भी आवेदन नहीं दिया गया। 

इन बैंकों को दिया गया था इतना लक्ष्य 

बैंक ऑफ बड़ौदा अपने लक्ष्य के पास है। पंजाब नेशनल बैंक ने जहां मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में अभी तक एक भी ऋण नहीं दिया है, वहीं इसमें मात्र एक लाभार्थी को लोन दिया है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए एक जिला, एक उत्पाद योजना में जिले में 110 लाभार्थियों को ऋण देने का लक्ष्य तय किया गया था। इसमें स्टेट बैंक को कम से कम 22, पंजाब नेशनल बैंक को 16 और बैंक ऑफ बड़ौदा को 15 लाभार्थियों को ऋण देने का लक्ष्य दिया गया था। बाकी सभी के लक्ष्य दहाई के अंदर थे। वित्तीय वर्ष खत्म होने के करीब है लेकिन अभी सिर्फ बैंक ऑफ बड़ौदा ही लक्ष्य में दहाई संख्या में पहुंच पाया है। स्टेट बैंक दूसरी कई योजनाओं की तरह सबसे ज्यादा लक्ष्य दिए जाने के बाद भी बहुत पीछे है। उसने 22 के मुकाबले अभी तक तीन लाभार्थियों को ही ऋण दिया है, जबकि उसके पास 22 आवेदन लंबित हैं। यूनियन बैंक को आठ लाभार्यियों का लक्ष्य दिया गया था और उसने दिसंबर तक आठ ऋण वितरित भी कर दिए। बैंक आफ इंडिया भी अपने लक्ष्य के करीब है। उसने सात के लक्ष्य के मुकाबले छह ऋण वितरित कर दिए हैं।

इनका ये है कहना  

कई बैंकों को किसी आवेदक ने नहीं चुना है, वहीं कई बैंकों में पात्रता की जांच करने पर आवेदनों को वापस करना भी पड़ा। दिसंबर तक 83 आवेदन वापस किए गए हैं। जो आवेदन लंबित हैं, उनकी जांच हो रही है। - एके वर्मा, अग्रणी जिला प्रबंधक।

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