कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) की तकनीक से मशरूम 10 दिन पहले ही उग सकेंगे। उनका आकार और उत्पादन भी पहले के मुकाबले बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने इसके लिए दो तरह की तकनीक अपनाई, जिसमें से एक को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित कराया। यह तरीका किसानों और आमजन के लिए फायदेमंद है। जहां किसानों की कम समय में अतिरिक्त लाभ मिल सकेगा, वहीं लोगों को बेहतर मशरूम खाने को मौका मिलेगा।

अमूमन मशरूम 28 से 30 दिन में पूरी तरह से तैयार हो जाता है। इसको उगाने के लिए भूसे को 24 घंटे पानी में भिगोकर रखने के बाद बाहर निकालते हैं। इसमें पानी की मात्रा करीब 70 फीसद होना जरूरी है। भूसे में मशरूम के स्पान को मिला दिया जाता है। इन भूसे को प्लास्टिक के पैकेट में भरकर अंधेरे कमरे में रखते हैं। निर्धारित समय में ये तैयार हो जाते हैं।

संयुक्त निदेशक शोध डा. एके विश्वास ने बताया कि विश्वविद्यालय में दो तरह से काम किया है। पहले में भूसे के साथ गुड़-चोकर मिलाया गया, जबकि दूसरे में भूसे के साथ चोकर और मैग्नीशियम सल्फेट व कैल्शियम सल्फेट का मिश्रण बनाया। दोनों ही विधियों में बेहतर परिणाम सामने आए।

10 फीसद गुड़ मिलाया

उन्होंने बताया कि भूसे के साथ 10 फीसद गुड़ मिलाया जाता है। बाद में चोकर का इस्तेमाल किया जाता है। प्रयोगशाला में 20 से 22 दिन में मशरूम तैयार हो गए। इस विधि से एक दिन आगे-पीछे मैग्नीशियम सल्फेट और कैल्शियम सल्फेट से मशरूम उग जाते हैं। मैग्नीशियम सल्फेट और कैल्शियम सल्फेट की विधि को माइको पैथोलाजिकल रिसर्च में प्रकाशित किया गया है।

पौष्टिकता पर शोध जारी

विशेषज्ञों ने बताया कि मशरूम की पौष्टिकता पर शोध जारी है। इसमें देखा जाएगा कि साधारण विधि, गुड़ और केमिकल विधि से तैयार मशरूम में से किसमेें पौष्टिकता अधिक है। इस कार्य में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का सहयोग लिया जा सकता है।

Edited By: Abhishek Agnihotri