उन्नाव, जागरण संवाददाता। आसीवन थाने में तैनात रहे दो प्रभारियों के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। एक पर महिला की हत्या में निर्दोष युवक को जेल भेजने जबकि दूसरे पर गलत चार्जशीट लगाने का आरोप है। जिस महिला की हत्या बताई गई, वह जिंदा मिली थी। निर्दोष युवक को कई महीने जेल में रहना पड़ा था। युवक की शिकायत पर पेश होने के आदेश के बाद हाजिर न होने पर कोर्ट ने दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। दोनों की गिरफ्तारी व दो नवंबर तक कोर्ट में पेश करने के लिए पुलिस ने टीम गठित की है।

आसीवन थानाक्षेत्र के शेरपुर कलां गांव के पास दो अप्रैल 2018 को एक महिला का शव मिला था। प्रधान कृष्णपाल यादव की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। महिला के फोटो, कपड़े व ज्वैलरी से कुछ लोगों ने श्रद्धा उर्फ माही पत्नी योगेंद्र कुमार के रूप में पहचान की थी। उसके पति ने सदर कोतवाली क्षेत्र के जुराखनखेड़ा निवासी प्रमोद पर पत्नी को बहलाकर ले जाने और हत्या करने का आरोप लगाया था। तत्कालीन एसओ सियाराम वर्मा ने युवक को जेल भेज दिया था। उनका स्थानांतरण होने के बाद एसओ जयशंकर सिंह ने उसके विरुद्ध चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। अक्टूबर 2020 में महिला का पैनकार्ड जब डाक से उसके घर पहुंचा तो लोगों ने उसके जिंदा होने की जानकारी तत्कालीन एसओ राजेश सिंह को दी। पुलिस ने महिला के स्वजन का डीएनए कराने को कोर्ट से अनुमति लेकर चार लोगों का सैंपल लैब भेजा। जांच में मृत महिला का डीएनए उसके स्वजन के नमूने से मैच नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस महिला की खोज में जुट गई। इस बीच महिला पैनकार्ड लेने गांव पहुंची तो उसे मियागंज चौराहे से पकड़ा गया। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपित को रिहा कर जांच में गडबड़ी करने पर दोनों थाना प्रभारियों को समन भेज तलब किया था। अपर जिला जज चतुर्थ ने उन्हें गिरफ्तार कर दो नवंबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।

एक पदोन्नत होकर सीओ बने, दूसरे इंस्पेक्टर: आरोपितों में सियाराम वर्मा पदोन्नत होकर जिला बांदा में सीओ हैं। जयशंकर सिंह इंस्पेक्टर होकर शाहजहांपुर जिला के थाना रोजा में तैनात हैं। 

बड़ा सवाल, शव किसका था: पुलिस के महिला को जिंदा खोजने के बाद बड़ा सवाल यह है कि उस वक्त मिला शव किस महिला का था। तत्कालीन एसपी ने इसकी जांच को भी कहा था लेकिन आज तक असलियत सामने नहीं आई।

Edited By: Shaswat Gupta