कानपुर, [प्रशांत शर्मा]। भारतीय संस्कृति की वैदिक ऋचाएं कितनी सशक्त रहीं हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। हमारे धर्म ग्रंथों में बड़े से बड़े संकट का उपचार छिपा है और प्राचीन चारों वेदों पर दुनिया में वैज्ञानिक शोध भी कर रहे हैं। भारतीय प्राचीन संस्कृति में हवन, यज्ञ और मंत्रों से ही कष्टों का निवारण होता रहा है, इससे स्पष्ट है कि किसी भी बड़े संकट को वैदिक उपचार से भी दूर करने का प्रयास किया जा सकता है। इस बात को दृष्टिगत रखते हुए गायत्री परिवार भी देश-दुनिया के लिए संकट बने कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए वैदिक उपचार करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आने वाली 31 मई को दुनिया के दस लाख घरों में एक साथ यज्ञ में आहुतियां देने की शुरुआत की जाएगी।

कोरोना से मुक्ति के लिए गायत्री परिवार की पहल

आज देश में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में मरीजों के उपचार में डॉक्टर एक योद्धा की तरह मोर्चा ले रहे हैं तो देश-दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की दवा से लेकर वैक्सीन तैयार करने के लिए शोध में जुटे हैं। आइआइटी समेत तकनीकी संस्थान आम जन को कोरोना से बचाने के लिए तरह-तरह के अाविष्कार करके अपनी महती भूमिका निभा रहा है। इन सबके बीच कोरोना से मुक्ति के लिए गायत्री परिवार भी प्राचीन वैदिक विधि से पहल करने की तैयारी कर चुका है। 

31 मई को दुनिया सौ देशों में एक साथ होगा अनुष्ठान

अखिल विश्व गायत्री परिवार के कन्नौज जिला संयोजक उमेश चंद्र मिश्रा बताते हैं कि विश्वव्यापी यह अनुष्ठान 31 मई को दुनिया सौ देशों में परिवार के दस लाख घरों में एक साथ संपन्न होगा। गायत्री परिवार के शांतिकुंज हरिद्वार से सभी परिवार के सदस्यों के लिए जारी एडवाइजरी में 31 मई को प्रातः 9 बजे से 12 बजे तक यज्ञ सम्पन्न करने की एडवाइजरी जारी की गई है।उन्होंने बताया कि चूंकि पूरी कोरोना वायरस वैश्विक महामारी बन गया है, इसलिए कई देशों में एक साथ इस अनुष्ठान की तैयारी की गई है। यज्ञ के समय गायत्री मंत्र के साथ 24 और महामृत्युंजय मंत्र के साथ पांच बार आहुति देनी है। इसके लिए सभी सदस्यों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है और यज्ञ की विधि और लाभ की जानकारी दी जा रही है।

जानें-कैसे संपन्न होगा यज्ञ

उन्होंने बताया कि प्राचीन काल से हवन और यज्ञ खास रहा है, इसमें आहूति की सामग्री का विशेष होती है। विशेष मंत्रों के साथ यज्ञ दी आहूति के बाद उठने वाला धुआं कई तरह की महामारियों का विनाश करने की ताकत रखता है। यज्ञ में गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के साथ अमृता, ब्राह्मी, आज्ञाघास, तिल, गाय का घी, अगर-तगर, नीम, पाकड, आम की लकड़ी, गिलोय, लौंग, गाय के गोबर से बने कंडे के मिश्रण की आहूति दी जाएगी।

कोरोना से मुक्ति के लिए तीन विशेष आहुतियां

गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के वरिष्ठ साधक आलोक दीक्षित बताते हैं कि हमारे वेद-पुराणों में अनेक ऐसे मंत्रों और उपायों का जिक्र है, जो स्वास्थ्य रक्षा के लिए लाभदायक हैं। वैदिक काल के ये मंत्र आज भी अचूक हैं। हमारी युवा पीढ़ी इससे अंजान है। लोक कल्याण के लिए इस अनुष्ठान में कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के लिए तीन विशेष कृमिनाशक मंत्रों के साथ आहुतियां दी जाएंगी। इन कृमिनाशक मंत्रों का वर्णन अथर्व वेद में भी है, जो कि इस तरह है...। यहां कृमि का अर्थ हम आज के युग में बैक्टीरिया या वायरस को मान सकते हैं।

कृमिनाशक मंत्राहुति

ऊं उद्यन्नदित्य: क्रिमीन् हन्तु, निम्रोचन् हन्तु रश्मिभि:

ये अन्त: क्रिमयो गवि, स्वाहा। इदं आदित्यगणेभ्य: इदं न मम।।

रोग निवारण मंत्र

ऊं शीर्षक्तं शीर्षामयं, कर्णसूलं विलोहितम्।

सर्वं शीर्षण्यं ते रोगं, बहिर्निमन्त्रयामहे।। स्वाहा इदं सूर्याय, इदं न मम।।

लोक सुरक्षा मंत्र

ऊं अग्ने वैश्वानर विश्वैर्मा, देवै: पाहि स्वाहा। स्वाहा इदं वैश्वानराय, इदं न मम।। 

Posted By: Abhishek Agnihotri

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस