कानपुर, शशांक शेखर भारद्वाज। लॉकडाउन का अनलॉक-1 के बाद बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन और बाजारों में भीड़ की संभावना भी बढ़ गई है, ऐसे में भीड़ के बीच कोरोना संक्रमित की पहचान मुश्किल हो सकती है लेकिन हार्टकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनीवर्सिटी के छात्रों ने यह मुश्किल भी आसान कर दी है। एचबीटीयू के छात्रों का बनाया वर्चुअल रिएलिटी बॉक्स अब भीड़ में भी कोरोना संक्रमित की पहचान कर लेगा। 

आसानी से पकड़े जाएंगे अधिक तापमान वाले

रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या भीड़भाड़ वाले अन्य स्थलों पर अब ज्यादा तापमान वाले संक्रमित लोग आसानी से पकड़े जा सकेंगे। इसमें एक व्यक्ति पीपीई किट और पूर्ण सुरक्षा के बीच थर्मल कैमरा और मोबाइल से कनेक्ट वर्चुअल रिएलिटी बॉक्स को आंखों पर पहनेगा। थर्मल कैमरे की रेंज पांच से सात मीटर होगी। भीड़ की ओर देखते ही इंफ्रारेड तकनीक की मदद से ज्यादा तापमान वाले लोग पकड़ में आ जाएंगे और उन्हें किनारे करके गहन जांच की जाएगी। इससे कोरोना संक्रमण रोकने में काफी मदद मिलेगी।

इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेल में भेजा आइडिया

वर्चुअल रिएलिटी बॉक्स का प्रोटोटाइप मॉडल एचबीटीयू के इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रथम वर्ष के स्वपनिल त्रिपाठी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के प्रद्युम्न ने तैयार किया है। उन्होंने आइडिया को इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेल में दिया है। साथ ही वह थर्मल कैमरे की सस्ती डिजाइन बनाने में जुटे हैं। विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने प्रोटोटाइप मॉडल को मंगवा लिया है। उसकी टेङ्क्षस्टग कर इसे शासन के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

इस तरह से करेगा काम

छात्रों ने बताया कि थर्मल कैमरे को हेलमेट या कंधे से लगाया जा सकता है। इसे मोबाइल से लीड के साथ जोड़ा जाएगा, जबकि मोबाइल वर्चुअल रिएलिटी बॉक्स से जुड़ा रहेगा। थर्मल कैमरा भीड़ की वीडियो लेगा और उसे मोबाइल में भेजेगा। मोबाइल में आई वीडियो बॉक्स के माध्यम से आसानी से नजर आ जाएगी। किसी भी व्यक्ति का तापमान बढ़ा है तो वह पहचान लिया जाएगा। थर्मल कैमरा करीब आठ से 10 हजार रुपये का आता है। वीआर बॉक्स 300 से 400 रुपये में मिलता है।

चंद सेकेंड में देखेगा असर

इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेल के इंचार्ज प्रो. नरेंद्र कोहली ने बताया कि थर्मल कैमरे में आया वीडियो सेकेंड में पूरी स्थिति को स्पष्ट कर देगा। छात्रों के प्रोटोटाइप मॉडल को विकसित किया जा रहा है। छात्र सस्ता थर्मल कैमरा तैयार कर रहे हैं। मॉडल और तकनीक विकसित होने के बाद उनका स्टार्टअप किया जा सकेगा। कान्सेप्ट काफी अच्छा है। एक बार में कई लोगों की जांच हो पाएगी।

Posted By: Abhishek Agnihotri

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