कानपुर, जेएनएन। कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट के संदेह में जीएसवीएम मेडिकल कालेज की कोविड-19 लैब से 12 सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आइजीआइबी) भेजे गए हैं। मेडिकल कालेज से इससे पहले 300 सैंपल भेजे जा चुके हैं। राहत की बात यह है कि किसी में भी डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि नहीं हुई है।

देश में कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट की दस्तक के बाद से ही प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी गई है। कोरोना संक्रमित ऐसे केस जिनकी सीटी वैल्यू 30 से कम है, उन सभी सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग कराने का निर्देश है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज की माइक्रोबायोलाजी विभाग की लैब से एक सप्ताह पहले 12 सैंपल भेजे गए थे। इन सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट का दिल्ली से आने का इंतजार है। माइक्रोबायोलाजी विभाग के प्रोफेसर डा. विकास मिश्रा का कहना है कि कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस वैरिएंट रिसेप्टर्स की मदद से अच्छी बांङ्क्षडग बनाकर फेफड़े की कोशिकाओं से मजबूती से चिपक कर उन्हें क्षतिग्रस्त करता है। कोरोना के इलाज के लिए उपलब्ध दवा डेल्टा प्लस वैरिएंट पर प्रभावहीन हो रही है। हालांकि इसके केस बहुत कम रिपोर्ट हुए हैं, इसलिए फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

वैक्सीन की एंटीबाडी को चकमा

अभी तक के उपलब्ध आंकड़े के मुताबिक वायरस का नया रूप कोरोना की वैक्सीन से बनी एंटीबाडी को भी चकमा दे रहा है। देखा गया है कि कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद बनी एंटीबाडी भी वायरस का संक्रमण होने पर पांच गुना तक कम हो जाती है।

इसका पालन है जरूरी

- आमजन कोविड प्रोटोकाल का पूरी तरह से पालन करें।

- मास्क जरूर लगाएं, शारीरिक दूरी का करते रहें पालन।

- देश में कोरोना वैक्सीनेशन की गति बढ़ाना जरूरी है।

- भीड़ न लगाएं, मिलने जुलने पर भी पाबंदी जरूरी।

-कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट ने चिंता बढ़ाई है। वायरस का नया रूप शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली को चकमा देने में कामयाब हो रहा है। वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट का पता लगाने के लिए 30 से अधिक सीटी वैल्यू वाले सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए नई दिल्ली भेजे जा रहे हैं। वायरस के नए रूप की गंभीरता कम करने का एक मात्र उपाय वैक्सीनेशन है। -डा. प्रशांत त्रिपाठी, नोडल अफसर, कोविड-19 लैब जीएसवीएम

Edited By: Abhishek Agnihotri