कानपुर, जेएनएन। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शहर को उत्तर और दक्षिण में बांट तो दिया, लेकिन अब उसे कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी बर्दाश्त करनी होगी। पीसीसी के इस निर्णय का पूर्व में ही लखनऊ तक खुलकर विरोध हो चुका था हालांकि अब यह विरोध एक बार फिर अंदरखाने शुरू हो चुका। कुछ कार्यकर्ता पार्टी छोड़ने की बात करने लगे हैं तो कुछ ने बैठक बुलाने का मन बनाया है। 

कानपुर में कांग्रेस को दो हिस्सों में बांटने की थी कवायद 

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान जब ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रियंका वाड्रा ने संभाली थी तब कानपुर महानगर को दो हिस्सों में बांटने की बात उठी थी। इसके लिए कानपुर से सुझाव मांगा गया जिसे शहर कांग्रेस कमेटी ने तत्काल खारिज कर दिया था। चूंकि तब यह अकेले कानपुर के लिए था इसलिए प्रदेश संगठन ने भी इस पर अपने कदम रोक दिए। छह माह पूर्व यह विषय फिर जिंदा हुआ। इस बार सुझाव प्रदेश के सभी बड़े महानगरों को दो हिस्सों में बांटने का था। जिस पर शहर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कई सदस्यों की ओर से इसका फिर कड़ा विरोध किया गया। बल्कि कानपुर से कई बड़े नेता लखनऊ पहुंचे और दो हिस्सों में बंटी कांग्रेस के नुकसान भी गिराए थे हालांकि प्रदेश संगठन ने विरोध को दरकिनार कर तीन दिन पहले अपना निर्णय दे दिया। 

संदेश भेजने का सिलसिला शुरू 

प्रदेश संगठन का यह निर्णय आने के बाद अंदरखाने असंतोष पनप रहा है। अध्यक्ष पद के एक दावेदार ने तो अपनी टीम के साथ पार्टी छोड़ने का मन बना लिया और अपने लोगाें को वाट्सएप ग्रुप पर संदेश भी भेजने शुरू कर दिए। इसके साथ ही बड़े नेता शनिवार को अपने पूर्व पदाधिकारियों की बैठक बुलाने का मन बना चुके हैं। पार्टी सूत्र बताते हैं कि धीरे-धीरे यह असंतोष बढ़ना तय है। दो पदाधिकारियों के सामने आने के बाद अभी और भी लोग विरोध का झंडा बुलंद कर सकते हैं।

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