जागरण संवाददाता, कानपुर : स्वच्छ भारत मिशन में शहरों की रैंकिंग तय करने के लिए भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। कानपुर में सरकार गोपनीय सर्वेक्षण भी करा रही है। पहले दिन टीम के तीन सदस्य नगर निगम में दस्तावेज पलट रहे थे तो बाकी सदस्य गुपचुप ढंग से शहर की रिपोर्ट तैयार कर रहे थे।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 की रैंकिंग तय करने के लिए भारत सरकार ने निजी कंपनी कार्वी को सर्वेक्षण का काम सौंपा है। शुक्रवार सुबह सर्वेक्षण टीम कानपुर पहुंच गई। यहां पहुंचने से पहले टीम ने नगर निगम अधिकारियों से संपर्क तक नहीं किया। सुबह नगर निगम कार्यालय पहुंच कर नगर आयुक्त अविनाश सिंह से मुलाकात की। टीम में कंपनी के लखनऊ कार्यालय से दो मूल्यांकनकर्ता आशुतोष दीक्षित और जितेंद्र सिंह आए हैं। वहीं, इन पर नजर रखने के लिए दिल्ली से ऑब्जर्वर अभय सिंह आए हैं। तीनों ही अधिकारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज श्रीवास्तव के कार्यालय में बैठे। वहां मिशन के तहत नगर निगम द्वारा कराए गए कार्यो की सर्वेक्षण में शामिल 44 बिंदुओं पर जानकारी ली। सभी कार्यो के प्रमाण पत्र भी लिए। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि दो दिन तक टीम दस्तावेज देखेगी, उसके बाद सौंपे गए प्रमाण पत्रों के आधार पर फील्ड विजिट कर भौतिक सत्यापन करेगी। उसी के आधार स्वच्छता में रैंकिंग तय होगी। वहीं, सर्वेक्षण को आई टीम के तीन सदस्य गोपनीय रूप से शहर में घूमते रहे। चुपचाप जाकर सफाई व्यवस्था देखते रहे और जनता से फीडबैक लेते रहे।

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मुस्तैद रहा निगम, मिल न जाए गंदगी

सर्वेक्षण टीम के आगमन को लेकर नगर निगम भी पूरी तरह मुस्तैद था। सभी जोन में सफाई व्यवस्था देखने के लिए छह-छह सदस्यों की टीम बना दी गई थी। अधिकारियों को साफ निर्देश थे कि जहां से भी गंदगी, सीवर जाम, बहाव आदि की सूचना मिले, उसका तुरंत निस्तारण करा दें। इसके अलावा नगर आयुक्त अविनाश सिंह भी सुबह से ही शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के भ्रमण पर निकल गए और सफाई आदि व्यवस्थाओं की जानकारी लेते रहे।

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रैंकिंग बढ़ने की पूरी उम्मीद

स्वच्छता एप में उप्र में कानपुर पहला स्थान हासिल कर चुका है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 में शहर देश के 675 शहरों में 175वें स्थान पर था। नगर निगम द्वारा लगातार किए गए प्रयासों से विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार रैंकिंग में बड़ा उछाल मिलेगा।

Edited By: Jagran