जागरण संवाददाता, कानपुर : कोर्ट की अनुमति और आदेश के बिना अग्रिम विवेचना करने के लिए कोर्ट से दस्तावेज ले जाना तत्कालीन सीओ कल्याणपुर राजेश कुमार यादव को भारी पड़ गया। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (स्पेशल सीजेएम)पीयूष वर्मा की अदालत ने इसे धोखाधड़ी और दस्तावेजों की चोरी मानते हुए तत्कालीन सीओ पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। ये भी कहा है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद एसएसपी कोर्ट को सूचित करें। प्रकरण में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

गोविद नगर पुलिस ने वर्ष 2010 में हितेश धवन आदि पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा दर्ज किया था। सरकार बनाम हितेश धवन आदि के नाम से मुकदमा स्पेशल सीजेएम की अदालत में लंबित था। 23 अप्रैल 2011 को गोविद नगर पुलिस ने कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट लगाकर मुकदमा बंद करने की अर्जी दे दी। मामला तत्कालीन एसएसपी के पास पहुंचा तो उन्होंने 22 नवंबर 2011 को अग्रिम विवेचना के आदेश दिए और जांच तत्कालीन कल्याणपुर सीओ राजेश कुमार यादव को सौंपी। तत्कालीन सीओ न्यायालय की अनुमति लिए बिना ही अंतिम रिपोर्ट के दस्तावेज कोर्ट से ले गए। उन पर ये आरोप लगाया गया कि सीओ ने धोखाधड़ी कर कोर्ट से दस्तावेज चोरी किए हैं। इस पर कोर्ट ने वर्तमान सीओ विकास कुमार पांडेय से स्पष्टीकरण मांगा था। सीओ ने माना कि अग्रिम विवेचना के लिए कोर्ट की अनुमति के बिना ही पत्रावली ली गई थीं। स्पष्टीकरण के आधार पर कोर्ट ने तत्कालीन सीओ राजेश यादव पर न्यायालय से धोखाधड़ी और दस्तावेज चोरी करने का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

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