कानपुर, जेएनएन। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान यूरिया और केमिकल खाद की बजाए गो आधारित प्राकृति खेती करें। गाय के गोबर और मूत्र का खेती में प्रयोग करें। प्रदेश सरकार ने पहले चरण में 1038 ग्राम पंचायत शामिल की हैं, जहां पर मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जो गांवों में जाकर किसानों को गो आधारित खेती का प्रशिक्षण देंगे। वह चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में नमामि गंगे योजना के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 

पूर्व प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत खराब मौसम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कुछ देरी से सीएसए कृषि विश्वविद्यालय पहुंचे। हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद महापौर प्रमिला पांडेय और जिलाधिकारी ने फूल भेंट करके उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री सबसे पहले चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा स्थल पर गए और उन्होंने पुष्प अर्पित करके नमन किया। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत आयोजित कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यहां से कृषि कार्यशाला के मंच पर गए। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अगर समृद्ध होगा तो देश खुद ही विकसित हो जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि किसान गो आधारित प्राकृतिक खेती करे ताकि धरती स्वस्थ और किसान समृद्ध रहे। कहा, जिस तरह पंजाब और हरियाणा में किसानों को कई तरह की समस्याओं से गुजरना पड़ता है ठीक वैसे ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान फसल के साथ खेतों में यूरिया बिछा देते हैं। इससे फसल भले ही ठीक हो जाती हो पर जमीन को नुकसान होता है और लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। 

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार अब हर एक गोवंश को टैग करने जा रही है। सभी के कान के पास एक निशान लगाया जाएगा, चाहे वह पालतू पशु हो या फिर निराश्रित। इस काम का जिम्मा पशुपालन विभाग को सौंपा गया है। अगर कोई किसान निराश्रित पशु को रखकर देखरेख करता है तो सरकार 900 रुपए प्रतिमाह का खर्च भी देगी। उन्होंने बताया कि 27 से 31 जनवरी के बीच गंगा यात्रा गुजरेगी तो 1038 ग्राम पंचायतों के किसानों से भी सरकार के प्रतिनिधि गो आधारित खेती पर चर्चा करेंगे।

पशुओं को होने वाले खुरपका और मुंहपका रोग को समाप्त करने के लिए सरकार कवायद कर रही है। प्रत्येक कमिश्नरी हेड क्वार्टर में लैब बनाई जाएंगी, जहां गो आधारित खेती अपनाकर प्राकृतिक उत्पादन करने वाले किसानों को प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

सीएम को याद आया सीसामऊ नाला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधन में सीसामऊ नाला का भी जिक्र किया। कहा, 128 वर्ष पुराने इस नाला से गंगा की गोद में करोड़ों लीटर सीवरेज रोज गिरता था। हालांकि नमामि गंगे योजना के तहत इसे ठीक करा दिया गया और अब गंगा पूरी तरह स्वच्छ हो गई हैं। इसकी बानगी कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री जी ने ने भी देखी थी।

प्रकृति के असंतुलन के लिए भगवान नहीं इंसान जिम्मेदार

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्रकृति असंतुलन के दुष्परिणाम पूरी दुनिया भुगत रही है, इसके लिए भगवान नहीं इंसान जिम्मेदार है। ऐसे में आवश्यकता है हमे प्रकृति के चक्र के पहचाने की। अगर हम प्राकृतिक खेती करेंगे तो प्राकृति असंतुलन को प्रकृति संतुलन में बदल देंगे। बुधवार वह चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में नमामि गंगे के तहत आयोजित कृषि कार्यशाला में किसानों को संबोधित कर रहे थे। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में किसानों ने केमिकलयुक्त खाद का भरपूर उपयोग किया, जिसका उन्हें फायदा भी मिला तो नुकसान भी काफी हुआ है। प्रकृतिक असंतुलन से बचने के लिए समय रहते सुधार किया जा सकता है। सरकार भी योजनाएं बना रही है, जिससे किसानों को जुडऩा है। इसपर विचार किया जाना चाहिये, एक अच्छा किसान वही है, जो समय के साथ खुद को भी बदलें। इसके बाद मुख्यमंत्री किदवई नगर में आयोजित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की भ्रांतियां दूर करने के लिए रैली को संबोधित करेंगे। केशव नगर स्थित कॉमर्शियल ग्राउंड में आयोजित होने वाली मुख्यमंत्री की जनसभा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

रासायनिक खेती से फसलों से हो रहा कैंसर

कार्यशाला में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि रासायनिक खेती से कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। पीजीआई चंडीगढ़ व देश के बड़े अस्पतालों की रिपोर्ट यह बताती है कि कुछ वर्षों में 25 से 30 फीसद कैंसर रोगी बढ़े हैं। इसका कारण रासायनिक खेती में 15 से 16 छिड़काव किए जाते हैं। 20 वर्षों तक उन्होंने रासायनिक खेती की तब इसके दुष्परिणाम जाने। पद्मश्री सुभाष पालेकर की प्राकृतिक खेती अपनाई तो न केवल उत्पादन बढ़ा बल्कि फसलें भी स्वस्थ पैदा हुई। कहा, डायबिटीज, हार्ट अटैक व कैंसर जैसी बीमारियां पहले नहीं थी। इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र में रासायनिक छिड़काव करते हुए 40 किसानों मौत आगोश में सो गए। गो आधारित खेती करके ना केवल हम बंजर जमीन को फिर से लहलहाने योग्य बना सकते हैं बल्कि मित्र कीट की संख्या भी खेतों में बढ़ाकर उसे लंबे समय तक जीरो बजट खेती योग बना सकते हैं। 

एक गाय से हो सकती तीस एकड़ पर खेती

राज्यपाल ने किसानों को बताया कि एक देसी गाय से 30 एकड़ जमीन पर खेती की जा सकती है। बीज अमृत, जीवामृत व घन जीवामृत खेती की जाल होते हैं। एक ग्राम गाय के गोबर में 300 करोड़ जीवामृत पाए जाते हैं। 180 लीटर पानी में 24 घंटे गोमूत्र और गोबर के अलावा डे से 2 किलो गुड़ व दाल का बेसन मिलाकर इसे तैयार किया जाता है ग्राम। इसके अलावा एक मु_ी बड़े पेड़ की मिट्टी बीच में डाली जाती है। प्राकृतिक खेती केंचुआ का इस्तेमाल भी किया जाता है। बताया, गुजरात में आठ से 10 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें आशा है कि 2022 तक गुजरात के किसान शत-प्रतिशत खेती करेंगे। 

Posted By: Abhishek

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