चित्रकूट, जेएनएन। Chitrakoot Jail Gangwar जेल में मैनुअल का पालन किया गया होता तो चित्रकूट जेल में मुठभेड़ न हुई होती। जेलर और अन्य अधिकारियों ने मैनुअल की जमकर धज्जियां उड़ाईं। बिना तलाशी के ही बैरकों को खोल दिया गया था। 

जिला जेल में गैंगवार व मुठभेड़ की जांच कर रही टीमों के सामने जेल अधिकारियों के लापरवाही सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक घटना के एक सप्ताह पहले से जेल में मैनुअल का पालन नहीं हो रहा था। हाई सिक्योरिटी से लेकर सामान्य बैरकों को बिना बंदियों और कैदियों की तलाशी के खोला जा रहा था। नियम है, प्रतिदिन रात में हाई सिक्योरिटी बैरक की तलाशी लेने के बाद ही जेलर बंदियों-कैदियों को बंद करेंगे। सुबह फिर तलाशी लेकर बैरक खोली जाएगी, लेकिन ऐसा  कुछ नहीं किया जा रहा था। पैसे के बल पर जेल में बंद माफिया अधिकारियों को मूक दर्शक बनाए थे। यदि जेल मैनुअल के तहत तलाशी लेकर बैरक को खोला और बंद किया गया होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। 

घटना के बाद हंस रहा था एक जिम्मेदार अधिकारी: सूत्रों के मुताबिक जेल में घटना सुनियोजित प्लानिंग के तहत हुई थी। यह एक जिम्मेदार अधिकारी का कहना है। उसमें मुख्य भूमिका हाई सिक्योरिटी बैरक की देखरेख करने वाले एक अधिकारी की है। वह घटना के बाद हंस रहा था। कह रहा था, अपराधी हैं....मरने कटने दो। बताते हैं कि अधिकारी इसी साल चित्रकूट स्थानांतरित होकर आए हैं।

 

Edited By: Shaswat Gupta