कानपुर, जेएनएन। बाबूपुरवा में शुक्रवार को अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने वाला मासूम छोटी से ही उम्र में घर चलाने के लिए माता-पिता का हाथ बटाता था। हादसे के वक्त वह अपने पिता के साथ लौट रहा था। इस दौरान ट्रक की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई।

बाबूपुरवा बगाही निवासी ज्ञानचंद्र उर्फ सलीम रिक्शा चलाने के साथ ही कबाड़ बीनने का काम करते हैं। परिवार में पत्नी नफीसा और तीन बेटियां व तीन बेटे हैं। ज्ञानचंद्र ने बताया कि पत्नी भी बाबूपुरवा स्थित कबाड़ की दुकान में काम करती है। परिवार चलाने के लिए आठ वर्षीय बेटा रियाज भी उनके साथ कबाड़ बीनने का काम करता था। शुक्रवार को वह रियाज के साथ काकादेव गए थे। वहां से लौटने के बाद शाम को नयापुरवा में रिक्शा खड़ा किया। इसके बाद वह पैदल बेटे के साथ घर आ रहे थे। वह रास्ते में कुछ सामान खरीदने लगे। देरी होने पर बेटा अकेले ही घर जाने की जिद करने लगा। जैसे ही उसने रोड पार करने का प्रयास किया, ट्रक की चपेट में आ गया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने उन्हें पकड़कर खींच लिया, जिससे उनकी जान बच गई। थाना प्रभारी देवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि स्वजन से तहरीर लेकर ट्रक चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बच्चे की मौत में अतिक्रमण भी जिम्मेदार

बाबूपुरवा में सड़क हादसे में हुई मासूम की मौत की एक वजह अतिक्रमण भी है। रोड के दोनों तरफ अतिक्रमण होने से मजबूरन वहां से गुजरने वाले राहगीरों को सड़क के बीच से होकर चलना पड़ता है। इस दौरान अक्सर अनियंत्रित वाहनों की चपेट में आकर दुर्घटनाएं होती हैं। बाबूपुरवा में बाकरगंज चौराहे से लेकर किदवई नगर स्थित चालीस दुकान बाजार तक सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण है। बाकरगंज चौराहे के पास रोड के दोनों ओर ट्रक रिपेयरिंग, खरादी व कारों की सर्विस समेत अन्य काम होते हैं। इसकी वजह से पैदल राहगीरों व दुपहिया वाहनों को सड़क के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।

स्थानीय लोगों कहना है कि जिस ट्रक से मासूम की मौत हुई, वह रिपेयरिंग के लिए ही आया था। ट्रक किनारे से चल रहा था, यही वजह कि पिता का हाथ छूटते ही बच्चा ट्रक की चपेट में आ गया। स्थानीय निवासी आमिर और सुनील ने बताया कि बाकरगंज चौराहे से लेकर चालीस दुकान तक दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। बीच में ठेले, ई-रिक्शा, टेंपो और आटो वाले भी खड़े रहते हैं।

Edited By: Abhishek Agnihotri