कानपुर, जेएनएन। सीबीएसई 12वीं का परीक्षा परिणाम आते ही छात्र-छात्राओं में खुशी की लहर है तो उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। परिचित और पड़ोसी घरों में आकर शुभाशीष दे रहे हैं तो दोस्त और परिचित फोन और सोशल साइट के माध्यम से बधाई दे रहे हैं। शहर में मेधावियों ने अपनी सफलता का राज और ख्वाहिश भी साझा की है।

डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की मदद करना चाहते अविरल

सीबीएसई 12वीं के परिणाम में दिल्ली पब्लिक स्कूल बर्रा में पढ़ने वाले अविरल मिश्रा ने विज्ञान वर्ग में 98.6 फीसद अंक जिले के मेधावी छात्र बन गए हैं। उनके पिता आशुतोष मिश्रा स्माल आर्मस फैक्ट्री में इंजीनियर हैं, जबकि माता मधु मिश्रा गृहणी हैं। बेटे की इस उपलब्धि से पूरा परिवार बेहद खुश है। अविरल कहते हैं कि अक्सर ही देखने-सुनने को मिलता है, कि जो जरूरतमंद हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

उन्हें ठीक तरह से इलाज मुहैया नहीं होता, इसलिए मैंने सोचा है, कि मैं भविष्य में डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की मदद करूंगा। अविरल ने बताया कि उसने परीक्षाओं की तैयारी के दौरान पिछले 10 वर्षों के अनसॉल्वड पेपर हल किए। पढ़ाई के अलावा खेलों में शतरंज अविरल की पहली पसंद है। अविरल को फिजिकल एजूकेशन में 100, जीवविज्ञान, हिंदी व भौतिकी में क्रमश: 99 अंक मिले।

कच्चे रास्तों ने दिखाया सफलता का मार्ग

सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 98.4 फीसद अंक प्राप्त करने वाली डीपीएस बर्रा की मेधावी देविका रस्तोगी को सफलता का रास्ता घर से स्कूल जाने वाले मार्ग ने दिखाया। कच्चे रास्तों पर चलकर वह स्कूल जाया करतीं तो उनके जहन में ख्याल आता कि ऐसा क्या किया जाए कि इसे वह पक्का बनाकर अपने जिले का विकास कर सकें। पिता मनीष रस्तोगी से जब उन्होंने पूछा तो उन्होंने बताया कि आइएएस बनकर लोगों की जरूरतों को पूरा करके विकास के ऐसे कई काम किए जा सकते हैं।

देविका ने बताया कि वह मूल रूप से फतेहपुर की रहने वाली हैं और बचपन वहीं बीता है। अपने जिले की तुलना कानपुर व लखनऊ जैसे बड़े शहरों से करतीं तो सुविधाओं का आभाव लगता है। पक्की सड़क, पक्के मकान व यातायात के साधन यह सभी उनके जिले की अपेक्षा बड़े शहरों में कहीं अधिक है। दूसरों के लिए कुछ करने का जज्बा व पिता की प्रेरणा से उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से 12 घंटे नियमित पढ़ाई की और परीक्षा में सौ फीसद देकर पिता का मान बढ़ाया है। अब वह पिता का सपना साकार करने के लिए दिल्ली विवि से बीए आॅनर्स करने के साथ आइएएस की तैयारी करेंगी। उनकी मां दिव्या रस्तोगी गृहणी हैं।

तनाव में उलझी जिंददी को राह दिखाने के लिए चुना मनोविज्ञान

सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 98.2 फीसद अंक प्राप्त करके डीपीएस कल्याणपुर की मेधावी बनीं दिया पंत की आदर्श उनकी बड़ी बहन वर्तिका पंत हैं। वह भी अपनी बड़ी बहन की तरह दिल्ली विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में आॅनर्स करके मनोवैज्ञानिक बनने की ख्वाहिश रखती हैं। दिया ने बताया कि भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव के जाल में लोग फंसते जा रहे हैं।

अगर उन्हें सही मार्गदर्शन मिल जाए तो आत्महत्या के मामले कम हो सकते हैं। जीवन के उतार चढ़ाव में सही दिशा से भ्रमित होने वाले ऐसे लोगों को सही राह दिखाने के लिए उन्होंने मनोविज्ञान को चुना है। वह ऐसी घटनाओं को रोककर दूसरों की जिंदगी बचाना चाहती हैं। इस विषय में रुचि उनकी उस वक्त से है, जब उनकी बड़ी बहन ने यह विषय चुना था। उनके पिता डाॅ. एसके पंत एक चिकित्सक व मां चेतना पंत बिजनेस वूमन हैं।

अस्तित्व का बीएचयू से बीएससी करने का इरादा

फतेहपुर के चिल्ड्रन पब्लिक स्कूल के छात्र अस्तित्व दुबे ने 98.4 प्रतिशत अंक हासिल किया है। अस्तित्व के पिता को-ऑपरेटिव बैंक कर्मी हैं और मां वर्षा दुबे ग्रहणी हैं। उनकी बड़ी बहन अदम्या दुबे बीएचयू से बीएससी कर रही है। अस्तित्व ने कहा कि वह बीएचयू से बीएससी करेंगे। क्रिकेट खेलने का शौकीन अस्तित्व फुटबॉल देखना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा िकि उसे राजनीति पसंद नहीं है, हालांकि भविष्य को लेकर कुछ नहीं बताया। 

Posted By: Abhishek Agnihotri

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