कन्नौज, जेएनएन। इत्र की खुशबू से महकने वाली कन्नौज की धरा कई स्वर्णिम पलों की गवाह है। अतीत के इन पलों कों याद कर हर कोई गौरवान्वित हो जाता है। चाहे वो आजादी के आंदोलन के समय यहां महात्मा गांधी का आना हो या फिर लाल बहादुर शास्त्री का दौरा। एक यादगार पल नेताजी सुभाषचंद्र बोस के यहां आगमन का भी है। 1940 में उन्होंने यहां आकर युवाओं में जोश भरा। युवाओं को हीरोज ऑफ कन्नौज नाम से नवाजा।

वर्ष 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में नेताजी ने पट्टाभिसीता रमैया को हराया था। इस हार से गांधी जी दुखी हुए। उन्होंने यह कह दिया कि रमैया की हार, मेरी हार है। इस पर नेताजी ने न सिर्फ कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया बल्कि कांग्रेस को ही छोड़ दिया था।

इसके बाद उन्होंने राजनीतिक दल फारवर्ड ब्लाक की स्थापना की और भारत भ्रमण पर निकले। उनकी इस यात्रा का गवाह कन्नौज भी बना। 1940 में वह कन्नौज आए। इतिहासकार बताते हैं कि नेताजी के कांग्रेस छोड़ने पर कांग्रेसी उनके स्वागत को तैयार नहीं हुए थे।

इस पर कन्नौज के युवकों ने आजाद नवयुवक संघ नाम के संस्था का गठन किया। इसमें रामगोपाल शुक्ला, जगदीश चंद्र दुबे, प्रकाश अग्निहोत्री, राधे श्याम तिवारी आदि लोग थे। नेताजी पहुंचे तो इन सभी ने उनका जोरदार स्वागत किया। नेताजी को मकरंद नगर स्थित जीआइसी हवेली में ठहराया गया था।

फूलमती देवी मंदिर के परिसर में उन्होंने सभा की। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वाेपरि बताया। सभा में उन्हेंं सुनने के लिए हजारों लोग पहुंचे थे। मंच से ही नेताजी ने आजाद नवयुवक संघ के युवाओं हीरोज ऑफ कन्नौज का नाम दिया। बताते हैं कि इसी से प्रेरणा लेकर उन्होंने आजाद हिंद फौज बनाई थी। 

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