कानपुर देहात, जागरण संवाददाता। बिकरू कांड के मास्टरमाइंड कुख्यात विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे की अग्रिम जमानत मामले में शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने जमानत प्रार्थनापत्र खारिज करने के लिए दलील दी, जबकि बचाव पक्ष ने साक्ष्यों के साथ तर्क दिए। न्यायालय ने सुनवाई के लिए 18 जनवरी की तिथि नियत की है। 

चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 को दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे गैंग ने फायरिंग कर दी थी। घटना में आठ पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हो गए थे। मामले में पुलिस ने विकास दुबे की पत्नी रिचा पर फर्जी दस्तावेजों से सिम लेने का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष न्यायाधीश एंटी डकैती कोर्ट में चल रही है। रिचा की अग्रिम जमानत को लेकर बचाव पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार झा की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान बचाव व अभियोजन पक्ष की ओर से बहस हुई।

अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए जमानत प्रार्थना पत्र खारिज करने की मांग की। इसके साथ ही तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने सात दिन में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। वहीं बचाव पक्ष से पवनेश शुक्ला ने तर्क दिया कि अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। फर्जी दस्तावेज लगा सिम लेने के मामले की सुनवाई दस्यु प्रभावित कोर्ट में चल रही है, जबकि मामला दस्यु प्रभावित कोर्ट के क्षेत्राधिकार का नहीं है। इसको लेकर न्यायालय में पूर्व में प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है। जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि रिचा दुबे के अग्रिम जमानत मामले में न्यायालय ने 18 जनवरी की तिथि नियत की है। 

Edited By: Abhishek Verma